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गढ़पुरा नमक सत्याग्रह की 96वीं वर्षगांठ पर श्रद्धांजलि, स्मारक निर्माण में देरी पर उठा सवाल

गढ़पुरा में ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह की 96वीं वर्षगांठ पर स्मृति दिवस के अवसर पर एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन नमक सत्याग्रह गौरव यात्रा समिति, बेगूसराय के तत्वावधान में हुआ, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

कार्यक्रम के दौरान “आधुनिक बिहार के निर्माता अमर रहें”, “स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी अमर रहें”, “श्रीबाबू अमर रहें” और “बिहार केसरी अमर रहें” जैसे नारों से पूरा वातावरण देशभक्ति के जोश से गूंज उठा। बनारसी बाबू, कारी सिंह, महावीर यादव, मुंशी गोप और बुद्धु नोनिया जैसे स्थानीय सेनानियों को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया।

समिति के राष्ट्रीय महासचिव राजीव कुमार इस वर्ष पारिवारिक कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। पिछले 15 वर्षों में यह पहला मौका रहा जब वे अनुपस्थित रहे। अपने संदेश में उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए बताया कि 22 दिसंबर 2013 को आयोजित नमक सत्याग्रह नमन यात्रा के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यहां स्मारक निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद 71 डिसमिल भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना भी जारी हुई, लेकिन 13 वर्षों के बाद भी जमीन पर कब्जा नहीं लिया जा सका है, जो अत्यंत चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित योजना के तहत पार्क, दांडी यात्रा की तर्ज पर सत्याग्रहियों की आदमकद प्रतिमाएं, नमक निर्माण करते हुए श्रीबाबू एवं अन्य सेनानियों की मूर्तियां, पुस्तकालय, संग्रहालय, सार्वजनिक सुविधाएं और भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाने थे। साथ ही इस स्थल को “बापू सर्किट” से जोड़ने की भी योजना थी, जो अब तक अधूरी है।

समिति के पदाधिकारियों ने सरकार की उदासीनता पर नाराजगी जताते हुए बताया कि इस मांग को लेकर समय-समय पर अन्न सत्याग्रह, धरना, प्रदर्शन, मौन सत्याग्रह और सड़क सत्याग्रह जैसे कई आंदोलन किए गए, लेकिन प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

समिति के सचिव मुकेश विक्रम यादव ने बताया कि गढ़पुरा नमक सत्याग्रह स्थल को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से इसे गुजरात के साबरमती आश्रम, दांडी के राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक और सूरत के भीमराड से जोड़ा गया है। उन्होंने “बिहार केसरी” श्रीबाबू को अब तक भारत रत्न नहीं दिए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

महासचिव रमेश महतो ने स्पष्ट किया कि जब तक गढ़पुरा को बापू सर्किट से नहीं जोड़ा जाता और अधिग्रहित भूमि पर स्मारक निर्माण शुरू नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में जिलाधिकारी, पटना और दिल्ली में भी सत्याग्रह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इस वर्ष विरोधस्वरूप 17 से 21 अप्रैल तक प्रस्तावित मुंगेर-गढ़पुरा पदयात्रा को स्थगित कर कार्यक्रम स्थल पर ही सत्याग्रह आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के समापन के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी, गढ़पुरा को कोषाध्यक्ष सुशील सिंघानिया के नेतृत्व में एक ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की इस ऐतिहासिक धरोहर पर जल्द से जल्द भव्य स्मारक का निर्माण होना चाहिए और “बिहार केसरी” श्रीबाबू को शीघ्र भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।

संयोजक अरुण झा ने सरकार से इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के मुद्दे पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की। वहीं सह सचिव डोमन महतो और संजीव पोद्दार ने कहा कि जब तक मूल योजना के अनुसार स्मारक निर्माण नहीं हो जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

इस अवसर पर समिति के कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण और विकास की मांग दोहराई।

अजय शास्त्री की रिपोर्ट

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