राघोपुर। उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित कच्ची दरगाह–बिदुपुर सिक्स लेन पुल अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। रविवार को वैदिक रीति-रिवाज के बीच पाया संख्या 61 पर आखिरी सेगमेंट सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने का रास्ता साफ हो गया है।
पूजा के बाद जोड़ा गया अंतिम सेगमेंट
सुबह से ही निर्माण एजेंसी के अधिकारी मौके पर मौजूद थे। विशेष क्रेन और बार्ज (बाज जहाज) की मदद से अंतिम सेगमेंट को निर्धारित स्थान तक लाया गया। पूजा-पाठ और मंत्रोच्चार के बाद इसे सावधानीपूर्वक स्थापित किया गया। इस दौरान परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
तेजी से पूरा हो रहा निर्माण कार्य
एलएंडटी और कोरियाई कंपनी के संयुक्त उपक्रम द्वारा बनाए जा रहे इस पुल का काम अब अंतिम दौर में है। अधिकारियों का कहना है कि शेष कार्य जल्द पूरा कर यातायात शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
पुल की प्रमुख विशेषताएं
- कुल लंबाई: 22.76 किमी
- मुख्य पुल: 9.76 किमी (गंगा नदी पर)
- एप्रोच रोड: करीब 13 किमी
- कुल लागत: लगभग ₹4988 करोड़
- चौड़ाई: 32 मीटर (सिक्स लेन)
- डिजाइन: एक्स्ट्रा डोज्ड केबल स्टे तकनीक
यात्रियों को मिलेगा बड़ा लाभ
इस महासेतु के चालू होने से पटना से वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा और मधुबनी की दूरी और समय में बड़ी कमी आएगी। फिलहाल इन इलाकों के लिए गांधी सेतु और जेपी सेतु पर निर्भरता रहती है, जहां अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है।
पहले चरण का लाभ मिल चुका
परियोजना के पहले चरण में एनएच-31 से राघोपुर तक सड़क पहले ही शुरू हो चुकी है, जिससे स्थानीय लोगों की आवाजाही आसान हुई है।
जल्द शुरू होगा आवागमन
अधिकारियों के मुताबिक, बिदुपुर तक का हिस्सा भी जल्द पूरा कर 2026 तक पूरे पुल पर यातायात शुरू करने का लक्ष्य है।
बदल देगा क्षेत्र की तस्वीर
यह पुल सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाला अहम इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिससे व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।













