देश में एलपीजी गैस सिलेंडर की नई कीमतें जारी कर दी गई हैं, जिससे बाजार और कारोबार जगत में हलचल बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव तथा सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच यह आशंका जताई जा रही थी कि गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। नई दरों के सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है कि केवल कमर्शियल सिलेंडर महंगे हुए हैं, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को इस बार राहत दी गई है।
कमर्शियल सिलेंडर में बड़ा इजाफा
1 मई से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में करीब 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर लगभग 3,071.50 रुपये तक पहुंच गई है। मुंबई में यह करीब 3,024 रुपये और कोलकाता में लगभग 3,201.50 रुपये हो गया है।
इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा, जहां कमर्शियल गैस सिलेंडर का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
यह इस साल तीसरी बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले मार्च में 144 रुपये और अप्रैल में 200 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि अब मई में एक साथ 993 रुपये का बड़ा उछाल देखा गया है।
घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर
14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसका दाम 913 रुपये, मुंबई में 912.50 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये पर स्थिर है।
इस साल घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में केवल मार्च महीने में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन अब फिलहाल आम उपभोक्ताओं को राहत दी गई है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर
गैस कीमतों में इस बदलाव के पीछे वैश्विक कारण भी अहम माने जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव, साथ ही होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में संभावित बाधा ने सप्लाई को प्रभावित किया है।
यह मार्ग दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां किसी भी तरह की रुकावट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं।
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है, जिसमें बड़ा भाग सऊदी अरब और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता है। ऐसे में वहां की स्थिति का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है।
आम जनता और बाजार पर असर
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत बढ़ने से होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर की लागत बढ़ना तय है, जिससे आने वाले समय में खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर रहने से आम उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है।
कुल मिलाकर, इस बदलाव ने एक तरफ व्यापार जगत की चिंता बढ़ाई है तो दूसरी तरफ आम जनता को थोड़ी राहत भी दी है।
















