पटना/मोकामा:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग नज़दीक आते ही मोकामा विधानसभा सीट पर सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां जेडीयू प्रत्याशी और बाहुबली नेता अनंत सिंह की गिरफ्तारी ने माहौल बदल दिया है, वहीं दूसरी ओर अब केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने मैदान संभाल लिया है।
रविवार (30 अक्टूबर) को मोकामा के तारतर इलाके में हुई हिंसक झड़प में जनसुराज कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या के बाद सियासी हलचल तेज हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह उर्फ छोटे सरकार को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
अब जेडीयू ने मोकामा सीट का मोर्चा सीधे ललन सिंह को सौंप दिया है। सूत्रों के मुताबिक, ललन सिंह सोमवार (3 नवंबर) से मोकामा में कैंप करेंगे और जेडीयू प्रत्याशी के समर्थन में लगातार जनसभाएं करेंगे। उनका पूरा कार्यक्रम तय कर लिया गया है —
वे पटना से सड़क मार्ग से रवाना होकर पंडारक पश्चिम, पंडारक पूर्वी, कन्हाईपुर, सुल्तानपुर, मोर पश्चिम, मोर पूर्वी, बरहपुर, शिवनर, छत्रपुर और मोकामा नगर परिषद क्षेत्र में जनसंपर्क करेंगे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी 4 नवंबर को मोकामा में सभा को संबोधित कर सकते हैं।
ललन सिंह मुंगेर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं, जिसके अंतर्गत मोकामा विधानसभा आती है। इसलिए पार्टी ने अब प्रचार की बागडोर उनके हाथों में सौंप दी है।
गौरतलब है कि अनंत सिंह मोकामा की राजनीति में 2005 से अब तक प्रभावशाली रहे हैं। वह पांच बार विधायक रह चुके हैं। 2020 में उन्होंने राजद के टिकट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन एक आपराधिक मामले में सजा होने के बाद उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई।
2022 के उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी ने राजद प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी।
अब 2025 में कहानी फिर वैसी ही दिख रही है —
अनंत सिंह जेल में हैं, पर चुनावी मैदान में उनके नाम की गूंज बरकरार है।
जेडीयू उनके भरोसे अपनी सीट बचाने की कोशिश में है, जबकि विपक्ष इसे सियासी मुद्दा बनाकर जनता के बीच उतर चुका है।
सवाल अब यही है —
क्या ‘छोटे सरकार’ जेल से फिर जीत की पटकथा लिख पाएंगे?
या इस बार मोकामा की सियासत में नया अध्याय शुरू होगा?
✍️ अजय शास्त्री की रिपोर्ट


















