मुजफ्फरपुर में साइबर ठगों के खतरनाक “डिजिटल अरेस्ट” खेल का पर्दाफाश हुआ है। साइबर थाना पुलिस ने 67 लाख रुपये की हाई-प्रोफाइल ठगी का खुलासा करते हुए पटना से बाप-बेटे को गिरफ्तार किया है। इस मामले ने साफ कर दिया है कि अब ठग डर और दहशत को हथियार बनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रियरंजन शर्मा और उसके बेटे अनंत अभिषेक के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, ये दोनों एनजीओ के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर देशभर में ठगी का नेटवर्क चला रहे थे। इनके पास से मोबाइल, लैपटॉप, बैंक दस्तावेज और कई संदिग्ध सामान बरामद किए गए हैं।
इस गिरोह ने काजी मोहम्मदपुर के आमगोला निवासी 66 वर्षीय रिटायर्ड बैंककर्मी महेश गामी को निशाना बनाया। 26 मार्च 2026 को एक वीडियो कॉल के जरिए खुद को CBI अधिकारी बताकर ठगों ने उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया और आरोप लगाया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और 5 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में हुआ है।
इसके बाद शुरू हुआ मानसिक दबाव का सिलसिला। करीब 10 दिनों तक उन्हें व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया। घर से बाहर निकलने और किसी से बात करने तक की पाबंदी लगा दी गई। अलग-अलग नंबरों से अधिकारी बनकर कॉल आते रहे, जिससे पीड़ित पूरी तरह डर के साये में आ गया।
ठगों ने सुप्रीम कोर्ट, RBI, CBI और ED के नाम पर फर्जी दस्तावेज भेजकर डर को और बढ़ा दिया। गंभीर धाराओं में फंसाने की धमकी देकर पीड़ित पर दबाव बनाया गया।
इस मानसिक दबाव में आकर महेश गामी ने 4 अप्रैल को 42 लाख और 6 अप्रैल को 25 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगी का एहसास होने पर उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
एसएसपी के निर्देश पर बनी विशेष टीम ने तकनीकी जांच और बैंक ट्रेल के जरिए इस गैंग तक पहुंच बनाई और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया है कि इन खातों से जुड़े 100 से ज्यादा शिकायतें देशभर में दर्ज हैं, जबकि चेन्नई और मुंबई में भी इनके खिलाफ पहले से केस दर्ज हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से नकदी, पासबुक, चेकबुक, स्कैनर और अन्य उपकरण जब्त किए हैं। साथ ही जनता से अपील की है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं होता। अगर कोई खुद को एजेंसी बताकर डराए या पैसे मांगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और नजदीकी साइबर थाने में शिकायत करें।
यह मामला साफ संकेत देता है कि अब साइबर ठगी केवल पैसों की चोरी नहीं, बल्कि लोगों के दिमाग और डर पर कब्जा करने की साजिश बन चुकी है।














