नालंदा जिले से एक बेहद चिंताजनक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। नगरनौसा प्रखंड के मध्य विद्यालय कैला में मिड-डे मील खाने के बाद करीब 50 से 60 बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। देखते ही देखते स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और बच्चों को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाना पड़ा। घटना के बाद इलाके में दहशत और अभिभावकों में भारी आक्रोश है।
जानकारी के मुताबिक बुधवार को स्कूल में बच्चों को मिड-डे मील के तहत चावल और छोला की सब्जी परोसी गई थी। भोजन करने के कुछ ही देर बाद बच्चों को पेट दर्द, उल्टी, दस्त और चक्कर आने जैसी शिकायतें होने लगीं। कई बच्चे बेहोश होकर गिर पड़े। स्थिति बिगड़ने पर स्कूल प्रशासन, शिक्षक और स्थानीय ग्रामीण तुरंत बच्चों को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरनौसा और चंडी रेफरल अस्पताल लेकर पहुंचे।
घटना की सूचना मिलते ही अस्पतालों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जैसे ही बच्चों के परिजनों को इसकी जानकारी मिली, वे घबराए हुए अस्पताल पहुंचने लगे। अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जुट गई। डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चों के इलाज में लगी रही। कुछ बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिनमें एक छात्रा को बेहतर इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल रेफर किया गया है।
पांचवीं कक्षा की छात्रा अमृता कुमारी ने बताया कि भोजन में किसी दवा जैसी गोली दिखाई दी थी। उसका कहना है कि खाना खाने के बाद अचानक कई बच्चों की तबीयत खराब होने लगी। वहीं कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि रोज की तरह इस बार भोजन परोसने से पहले शिक्षकों द्वारा भोजन की टेस्टिंग नहीं की गई थी। हालांकि बाद में अमरेश सर नामक एक शिक्षक ने भोजन खाया, जिसके बाद उन्हें भी चक्कर आने लगे और इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा।
घटना के बाद मिड-डे मील की आपूर्ति करने वाली संस्था “एकता फाउंडेशन” की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने संस्था पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता की सही जांच किए बिना बच्चों को खाना परोस दिया गया, जिसकी वजह से इतनी बड़ी संख्या में बच्चे बीमार पड़ गए।
अस्पताल में भर्ती बच्चों में अमृता कुमारी, अंकुश कुमार, अनुराधा कुमारी, तमन्ना, निशु, मुस्कान, कृति, ऋषि, आरती, सिमरन, खुशी, आदित्य, प्रियांशु, प्रिय, दीपक, प्रीति, डोली, सौरभ, किरण और राधा कुमारी समेत कई अन्य बच्चे शामिल हैं।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रजनी कुमारी ने बताया कि मिड-डे मील शुरू होने के कुछ समय बाद ही बच्चों की तबीयत खराब होने लगी। कई बच्चों को उल्टी-दस्त होने लगे, जबकि कुछ बच्चे बेहोश हो गए। स्थिति को देखते हुए तत्काल सभी बच्चों को अस्पताल भेजा गया। उन्होंने कहा कि घटना की सूचना विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है।
इधर घटना की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग और प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि भोजन या उसमें इस्तेमाल सामग्री में गड़बड़ी हो सकती है। प्रशासन ने खाने के सैंपल जांच के लिए भेजने की बात कही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि मिड-डे मील में लापरवाही की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से ऐसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं। लोगों ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
यह घटना एक बार फिर मिड-डे मील व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जहां बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की योजना कई बार लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आती है।
















