पटना/नई दिल्ली :
बिहार की राजनीति एक बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने वाले हैं। इससे पहले गुरुवार को वे पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो गए, जिसके बाद राज्य की सियासत में हलचल और तेज हो गई है।
नीतीश कुमार के दिल्ली रवाना होते ही राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने उन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा—
“बनकर भीगी बिल्ली चाचा चले गए दिल्ली… मौकापरस्ती और धोखा बिना भुगतान के पीछा नहीं छोड़ते… भुगतना पड़ गया ना चाचा जी…!”
रोहिणी ने आगे संकेत देते हुए कहा कि जल्द ही सत्ता से उनका नाता टूट सकता है।
सत्ता परिवर्तन के संकेत
जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी संकेत दिए हैं कि बिहार में नई सरकार का गठन 13 अप्रैल के बाद हो सकता है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक 14 या 15 अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है, जिसके लिए पटना का गांधी मैदान संभावित स्थल माना जा रहा है।
CM चेहरे पर सस्पेंस
सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर इस बार मुख्यमंत्री पद भारतीय जनता पार्टी के खाते में जा सकता है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है, हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव होगा, क्योंकि अब तक भाजपा राज्य में सहयोगी दल के रूप में ही सत्ता में रही है।
एक युग का संभावित अंत
वर्ष 2005 से लगातार बिहार की सत्ता संभाल रहे नीतीश कुमार की संभावित विदाई को एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनके दिल्ली जाने और राज्यसभा की ओर कदम बढ़ाने के साथ ही बिहार में नई राजनीतिक दिशा तय होने के संकेत मिल रहे हैं।
नजरें आगे क्या होगा पर
फिलहाल पूरे राज्य की निगाहें आगामी दिनों पर टिकी हैं—क्या वाकई सत्ता परिवर्तन होगा? क्या भाजपा पहली बार बिहार में अपने दम पर मुख्यमंत्री बनाएगी? और क्या नीतीश कुमार का लंबा राजनीतिक अध्याय अब नए मोड़ पर पहुंच गया है?














