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पटना गांधी मैदान में बदली सियासी तस्वीर: ईद की नमाज में पहली बार नहीं पहुंचे नीतीश, निशांत ने संभाली कमान

पटना के गांधी मैदान में इस बार ईद की नमाज के दौरान एक अलग ही सियासी तस्वीर देखने को मिली। वर्षों से चली आ रही परंपरा में बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। मंच वही था, माहौल भी वही, भीड़ भी हर साल की तरह उमड़ी—लेकिन चेहरा बदल चुका था।

करीब दो दशकों से नीतीश कुमार हर साल गांधी मैदान पहुंचकर नमाजियों से मुलाकात करते रहे हैं। 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से उन्होंने इस परंपरा को लगातार निभाया। नमाज के बाद वे मुस्लिम समुदाय के लोगों से गले मिलते, उन्हें ईद की मुबारकबाद देते और नेताओं द्वारा गमछा व टोपी पहनाकर उनका स्वागत किया जाता था। उनके साथ अक्सर मंत्री अशोक चौधरी भी मौजूद रहते थे।

लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई थी। पहली बार नीतीश कुमार गांधी मैदान नहीं पहुंचे। उनकी जगह उनके बेटे निशांत कुमार ने मौजूदगी दर्ज कराई। निशांत कुमार ने भी अपने पिता की परंपरा को निभाते हुए नमाजियों से मुलाकात की, उन्हें ईद की बधाई दी और लोगों के साथ घुलते-मिलते नजर आए।

गांधी मैदान में बड़ी संख्या में नमाजी जुटे थे और मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने निशांत कुमार का स्वागत किया। उन्हें गमछा और टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया। इस दौरान अशोक चौधरी भी उनके साथ मौजूद रहे। निशांत ने छोटे बच्चों के साथ भी आत्मीयता दिखाई—उन्होंने बच्चों के हाथों से मिठाई खाई और उन्हें खिलाई, जिससे वहां मौजूद लोगों के बीच एक सकारात्मक संदेश गया।

सबसे खास बात यह रही कि निशांत कुमार इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्तर की सुरक्षा व्यवस्था के साथ पहुंचे थे। इसने सियासी अटकलों को और तेज कर दिया। मीडिया से बातचीत में निशांत कुमार ने कहा कि वे अपने पिता की ओर से सभी नमाजियों और देशवासियों को ईद की शुभकामनाएं देने आए हैं। उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री और मेरे पिता जी की तरफ से सभी को ईद मुबारक, अल्लाह की बरकत हम सब पर बनी रहे।”

वहीं, नीतीश कुमार गांधी मैदान नहीं पहुंचे, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए प्रदेश और देशवासियों को ईद की बधाई दी। अपने संदेश में उन्होंने राज्य में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

गांधी मैदान की यह तस्वीर केवल एक धार्मिक आयोजन का दृश्य नहीं थी, बल्कि यह बदलते सियासी संकेतों की झलक भी दे रही है। एक तरफ वर्षों पुरानी परंपरा टूटी, तो दूसरी तरफ एक नया चेहरा सामने आया।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह महज संयोग नहीं हो सकता। निशांत कुमार की सक्रिय मौजूदगी को भविष्य की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में वे जनता दल (यूनाइटेड) की कमान संभाल सकते हैं।

फिलहाल, यह घटना कई सवाल छोड़ गई है—क्या यह सिर्फ एक दिन का बदलाव था या बिहार की राजनीति में किसी नई सियासी पारी की शुरुआत? इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।

राहुल कुमार की रिपोर्ट

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