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ऑपरेशन डर्टी पॉलिटिक्स’: “महिलाओं की सप्लाई” का सिंडिकेट सक्रिय था, जिनकी डीलिंग इंटरनेशनल कनेक्शन तक जुड़ी हुई बताई जा रही है

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच एक सनसनीखेज़ खुलासा सामने आया है। एक गुप्त पत्रकारिता जांच ‘ऑपरेशन डर्टी पॉलिटिक्स’ के तहत यह दावा किया गया है कि कुछ नेताओं तक पहुंच बनाने के लिए एक संगठित और सुनियोजित हनी-ट्रैप नेटवर्क सक्रिय था। इस नेटवर्क के तार न केवल देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े बताए जा रहे हैं, बल्कि इसमें विदेशी संपर्कों के भी प्रमाण मिलने की बात सामने आई है।

ऑन-डिमांड सप्लाई नेटवर्क का खुलासा

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बेहद पेशेवर तरीके से काम करता था। इसमें शामिल एजेंट चुनावी सीज़न में “ऑन डिमांड” सप्लाई का इंतज़ाम करते थे — यानी नेताओं की पसंद, कार्यक्रम और उपलब्धता के अनुसार संपर्क साधने की व्यवस्था की जाती थी। एजेंट्स का यह भी दावा था कि उनके पास “फिक्स” क्लाइंट्स की लिस्ट होती है, जिनसे डीलिंग सीधे तौर पर नहीं बल्कि तीसरे माध्यम से होती है।

कुछ एजेंटों की बातचीत गुप्त कैमरे में रिकॉर्ड हुई है, जिसमें वे खुद को बड़े नेताओं से जुड़ा बताते हुए चुनावी माहौल में “स्पेशल अरेंजमेंट्स” कराने की बातें करते नज़र आते हैं। बातचीत में “विदेश से आने वाले विज़िटर्स” का ज़िक्र भी मिला है, जिससे यह संदेह गहराता है कि नेटवर्क के कुछ तार देश से बाहर तक फैले हो सकते हैं।

जाँच की माँग और संभावित कार्रवाई

इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। महिला आयोग, EOW (Economic Offences Wing) और CBI से मामले की गहराई से जांच की मांग उठी है।
अगर जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ़ चुनावी नैतिकता ही नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

अब तक कोई आधिकारिक नाम नहीं

हालाँकि अब तक किसी भी राजनेता या राजनीतिक दल का नाम आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है। जांच एजेंसियाँ इस समय प्राथमिक साक्ष्यों की पड़ताल में जुटी हैं। पत्रकारिता ऑपरेशन से जुड़े स्रोतों ने बताया कि उनके पास कई घंटों के वीडियो फुटेज, कॉल रिकॉर्डिंग्स और चैट लॉग्स मौजूद हैं, जिन्हें आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित एजेंसियों को सौंपा जा सकता है।

चुनावी सियासत में नैतिकता पर बहस

इस खुलासे के बाद चुनावी राजनीति की साख पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों ने इस मामले को मुद्दा बनाते हुए कहा है कि “अगर सत्ता पाने की दौड़ में ऐसे नेटवर्क सक्रिय हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद शर्मनाक है।” वहीं सत्तारूढ़ दलों का कहना है कि “किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।”

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