ट्रैफिक चालान से लेकर वेतन और मोटर वाहन मामलों के निपटारे पर जोर, 11 मई को वकील न्यायिक कार्य से रहेंगे अलग
पटना हाईकोर्ट में शनिवार 9 मई 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया है। पहली बार पटना हाईकोर्ट में विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई और निपटारे के लिए अलग-अलग न्यायाधीशों की अध्यक्षता में 15 बेंचों का गठन किया गया है। इन बेंचों में एक हजार से अधिक मामलों की सुनवाई की जाएगी।
लोक अदालत में सेवानिवृत्ति, बिजली विवाद, अवमानना वाद, क्रिमिनल मिसलेनियस, मोटर वाहन अधिनियम, गैर राजपत्रित कर्मचारियों के वेतन संबंधी मामलों समेत कई लंबित विवादों पर सुनवाई होगी। इन मामलों का निपटारा आपसी सहमति और समझौते के आधार पर करने का प्रयास किया जाएगा।
राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना और सामान्य अदालतों पर बढ़ते बोझ को कम करना है। इसके साथ ही पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से विवादों का समाधान भी लोक अदालतों की प्राथमिकता होती है।
लोक अदालत के लिए गठित विभिन्न बेंचों की अध्यक्षता जस्टिस पार्थ सारथी, जस्टिस हरीश कुमार, जस्टिस शैलेन्द्र सिंह, जस्टिस अरुण कुमार झा, जस्टिस आलोक कुमार पांडेय, जस्टिस सुनील दत्त मिश्रा, जस्टिस चन्द्रशेखर झा, जस्टिस खातिम रजा, जस्टिस अंशुमान, जस्टिस अशोक कुमार पांडेय, जस्टिस सौरेनदर पांडेय, जस्टिस अजित कुमार, जस्टिस रितेश कुमार, जस्टिस प्रवीण कुमार और जस्टिस अंशुल राज करेंगे। प्रत्येक बेंच में एक अधिवक्ता को भी शामिल किया गया है।
राज्य की विभिन्न जिला अदालतों और अन्य न्यायालयों में भी राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों के निपटारे का प्रयास किया जा रहा है। बिहार में ट्रैफिक चालान से संबंधित ढाई लाख से अधिक मामले लंबित बताए जा रहे हैं।
पटना हाईकोर्ट ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार को ओड़िशा की तर्ज पर एकमुश्त यातायात विवाद निपटान योजना लागू करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार द्वारा इस योजना को लागू किए जाने के बाद अब ट्रैफिक चालान विवादों के तेजी से निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है।
इधर, 11 मई 2026 को पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से अलग रहेंगे। इस संबंध में हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं के तीन संघों की समन्वय समिति ने निर्णय लिया है। समिति के अध्यक्ष एवं वरीय अधिवक्ता Yogesh Chandra Verma ने बताया कि कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं की गाड़ियों की पार्किंग समस्या और अन्य सुविधाओं की कमी को लेकर वकीलों में व्यापक असंतोष है।
उन्होंने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान कुछ न्यायाधीशों द्वारा अधिवक्ताओं के साथ तल्ख व्यवहार भी इस निर्णय का एक प्रमुख कारण है। समिति के सदस्य वरीय अधिवक्ता Sanjay Singh, Mukesh Kant, Rajeev Kumar Singh और Jai Shankar Prasad Singh ने न्यायिक कार्यों से अनुपस्थित रहने का प्रस्ताव पारित किया।
समिति की ओर से यह प्रस्ताव पटना हाईकोर्ट के महानिबंधक को भेज दिया गया है। उल्लेखनीय है कि इस समन्वय समिति में बिहार राज्य बार काउंसिल के दो सदस्य भी शामिल हैं।
















