पटना/नई दिल्ली: संविधान संशोधन बिल के लोकसभा में गिरने के बाद सियासत तेज हो गई है। राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष Tejashwi Yadav ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और एनडीए पर तीखा हमला बोला है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में संविधान बदलने के गलत इरादे से लाए गए इस बिल का गिरना यह साबित करता है कि बहुमत के बल पर जनभावनाओं का गला नहीं घोंटा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के नाम पर विपक्षी दलों के अधिकारों और क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही थी।
‘विपक्ष की एकता से लोकतंत्र मजबूत’
तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्ष की चट्टानी एकता ने यह दिखा दिया है कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और जनतांत्रिक संरचना के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के अधिकारों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
‘बिना आम सहमति लाया गया बिल’
आरजेडी नेता ने आरोप लगाया कि यह विधेयक बिना सर्वदलीय सहमति और देशव्यापी विमर्श के जल्दबाजी में लाया गया था। उनके मुताबिक, सरकार के पास इस बिल के समर्थन में ठोस नैतिक और संवैधानिक आधार नहीं था।
चुनाव से जोड़कर लगाया आरोप
तेजस्वी यादव ने कहा कि पहले से पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन के लिए विशेष सत्र बुलाना सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश थी। उन्होंने इसे चुनावी राज्यों में फायदा उठाने के लिए किया गया “पाखंड और प्रोपेगेंडा” करार दिया।
संविधान संशोधन बिल के गिरने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।














