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विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को दिया अल्टीमेटम, 15 जनवरी तक निपटाने होंगे सभी लंबित भूमि और राजस्व मामले

पटना/भागलपुर।
बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को भूमि और राजस्व मामलों को लेकर कड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भूमि सुधार जनकल्याण संवाद में प्राप्त सभी आवेदन और लंबित शिकायतों का निष्पादन 15 जनवरी तक अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।

उपमुख्यमंत्री ने पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस समीक्षा में कई नई शिकायतें और सुझाव सामने आए हैं, और उन पर तत्काल निवारक पहल की गई है। 15 जनवरी के बाद इन मामलों की गहन समीक्षा की जाएगी। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी:
“अच्छा करेंगे, तो सम्मान मिलेगा; गलत करेंगे, तो कार्रवाई होगी। जो अपनी आदत नहीं सुधारेंगे, वे जिला से बाहर भी जाएंगे। पदाधिकारी चाहे ट्रांसफर हो गए हों या रिटायर, जिम्मेदारी से कोई नहीं बच सकता।”

समीक्षा बैठक में भागलपुर जिले के विभिन्न मापदंडों पर बारी-बारी से चर्चा की गई, जिसमें शामिल थे:

  • बिना कारण लंबित अभियान बसेरा दो
  • ऑनलाइन दाखिल-खारिज
  • परिमार्जन प्लस (डिजिटाइज जमाबंदी)
  • ई-मापी
  • डीसीएलआर कोर्ट और एडीएम कोर्ट के लंबित मामले
  • सरकारी जमीन का सत्यापन

विशेष रूप से इस्माइलपुर, नवगछिया, पीरपैंती, गोराडीह और रंगरा चौक अंचल की प्रगति अपेक्षाकृत कम पाई गई। उपमुख्यमंत्री ने अंचलाधिकारियों को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया कि वे 14 जनवरी तक सभी मापदंडों में प्रगति पूरी करें। 14 जनवरी के बाद सबसे अधिक लंबित मामले वाले अंचल और संबंधित पदाधिकारी व कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा, उन्होंने निर्देश दिया कि पिछले तीन-चार वर्षों में हुई रजिस्ट्री की लिस्ट का विश्लेषण किया जाए और बार-बार जमीन खरीद-बिक्री करने वाले भू-माफिया की पहचान की जाए। जटिल मामलों का निष्पादन एसडीओ और एसडीपीओ करेंगे और आदेश सीओ और डीसीएलआर द्वारा पारित किए जाएंगे। उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुनवाई के मामले एक सप्ताह के अंदर निपटाए जाएं, और स्टेट लेवल रैंक में निचले पायदान पर रहने वाले अंचलाधिकारी अपनी रैंक सुधारें।

इस बैठक और अल्टीमेटम का संदेश स्पष्ट है कि अब बिहार में भूमि सुधार और राजस्व मामलों में किसी भी तरह की ढील नहीं बरती जाएगी। सख्त निगरानी, समयबद्ध निष्पादन और कार्रवाई का यह निर्णय अधिकारियों को जिम्मेदारी के प्रति गंभीर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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