विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब इसका असर सिर्फ सड़क यातायात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गंगा किनारे बसे घाटों की व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है। उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क टूटने से हजारों लोग अब नाव और फेरी सेवा पर निर्भर हो गए हैं, जिससे हालात बेकाबू होते जा रहे हैं।
सुल्तानगंज–अगुवानी घाट पर यात्रियों का सैलाब
सुल्तानगंज और खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित अगुवानी घाट के बीच चल रही फेरी सेवा पर इन दिनों यात्रियों का भारी दबाव देखने को मिल रहा है। सुबह और शाम के समय घाटों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। लोगों को नाव पकड़ने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
कई जगहों पर हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि नाव में चढ़ने के दौरान धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी की स्थिति बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अचानक बढ़ी भीड़ के कारण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
सुरक्षा पर बड़ा सवाल, नाविकों पर बढ़ा दबाव
स्थानीय स्तर पर संचालित यह फेरी सेवा पहले सीमित यात्रियों के लिए पर्याप्त थी, लेकिन अब यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ गई है। छोटे-छोटे नाविकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जिससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी होने का खतरा बढ़ गया है।
लोगों का साफ कहना है कि इस स्थिति में किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है, अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए।
प्रशासन से मांग: बढ़े इंतजाम और सुरक्षा
यात्रियों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- अतिरिक्त नावों और फेरी सेवा की व्यवस्था की जाए
- घाटों पर पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई जाए
- भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ठोस प्लान बनाया जाए
- रोशनी, शेड और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं
घाटों पर बढ़ती अव्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी भी साफ नजर आ रही है।
सड़क से घाट तक संकट
विक्रमशिला सेतु के बंद होने का असर अब बहुआयामी हो चुका है। जहां एक तरफ सड़क मार्ग बाधित है, वहीं दूसरी तरफ गंगा घाटों की लाइफलाइन भी भारी दबाव में आ चुकी है।
अगर प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह संकट किसी बड़े हादसे में बदल सकता है।
















