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दुनिया में थायरॉइड कैंसर तेजी से बढ़ रहा, अमेरिका में दर सबसे अधिक—क्यों बढ़ रहे मामले?

थायरॉइड कैंसर के मामले दुनिया भर में तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं?

दुनिया के कई हिस्सों में थायरॉइड कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और यह वृद्धि अन्य कई प्रकार के कैंसरों की तुलना में कहीं अधिक है। विशेष रूप से अमेरिका में थायरॉइड कैंसर की दर सबसे अधिक तेजी से बढ़ने वाली कैंसर दरों में शामिल हो गई है।

थायरॉइड ग्लैंड, जो कि गले में एडम्स एप्पल के ठीक नीचे स्थित होती है, शरीर की हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, तापमान और वज़न जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाती है। जब इस ग्लैंड की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो थायरॉइड कैंसर विकसित होता है।

अमेरिका में मामलों में तीन गुना वृद्धि

‘सर्विलांस, एपिडेमियोलॉजी एंड रिजल्ट्स (SEER)’ डेटाबेस के अनुसार, 1980 से 2016 के बीच अमेरिका में थायरॉइड कैंसर के मामलों में 3 गुना से भी अधिक बढ़ोतरी हुई।

पुरुषों में प्रति एक लाख—2.39 से बढ़कर 7.54

महिलाओं में प्रति एक लाख—6.15 से बढ़कर 21.28

यूसीएसएफ़ की एंडोक्राइन सर्जन डॉ. सान्ज़ियाना रोमन के अनुसार, “मेडिकल प्रगति के बावजूद थायरॉइड कैंसर उन कैंसरों में से एक है जिनके मामले लगातार बढ़ रहे हैं।”

क्या रेडिएशन एक्सपोज़र इसकी वजह है?

रेडिएशन को लंबे समय से थायरॉइड कैंसर का एक प्रमुख जोखिम माना जाता है।

1986 का चेर्नोबिल हादसा—बेलारूस, यूक्रेन और रूस में बच्चों में मामलों में भारी बढ़ोतरी

जापान में परमाणु बम से बचे लोग—36% मामलों को बचपन के रेडिएशन एक्सपोज़र से जोड़ा गया

लेकिन 80-90 के दशक में अमेरिका या अन्य देशों में ऐसी कोई प्रमुख घटना नहीं हुई, जिसे हालिया बढ़ोतरी से जोड़ा जा सके।

क्या बेहतर डायग्नोसिस ही एकमात्र कारण है?

1980 के दशक में थायरॉइड अल्ट्रासाउंड का उपयोग शुरू हुआ, जिससे छोटे ट्यूमर भी पकड़े जाने लगे।
1990 के दशक में फाइन-नीडल एस्पिरेशन बायोप्सी ने और अधिक सटीकता दी।

मारिलैंड स्थित NCI की महामारी विज्ञानी कैरी किताहारा बताती हैं:

“अल्ट्रासाउंड से हम बेहद छोटे ट्यूमर भी पहचान पा रहे हैं, जो पहले सिर्फ़ गर्दन छूकर पहचानना संभव नहीं था।”

दक्षिण कोरिया में जब राष्ट्रीय थायरॉइड स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू हुआ, वहाँ भी मामलों में तेज़ उछाल आया।
कार्यक्रम घटते ही मामलों में गिरावट देखी गई—यह ओवर-डायग्नोसिस की पुष्टि करता है।

लेकिन, केवल ओवर-डायग्नोसिस ही पूरी कहानी नहीं है।

क्योंकि मामलों में वृद्धि सिर्फ छोटे ट्यूमर तक सीमित नहीं है

इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ़ कटानिया के प्रो. रिकार्डो विनेरी के अनुसार, यदि सिर्फ स्क्रीनिंग ही कारण होती तो हाई इनकम देशों में लगातार बढ़ोतरी दिखती, लेकिन मध्यम आय वाले देशों में भी वृद्धि हुई है।

सान्ज़ियाना रोमन के अनुसार:

“ऐसे क्षेत्रों में भी थायरॉइड कैंसर बढ़ रहा है जहाँ बड़े पैमाने की जांच प्रणाली मौजूद ही नहीं है।”

यह भी देखा गया है कि

बड़े और एडवांस्ड ट्यूमर वाले मरीज़ों की संख्या बढ़ रही है

स्टेज 1 में पहचान बढ़ने के बावजूद मृत्यु दर स्थिर या बढ़ती हुई दिख रही है

कैलिफ़ोर्निया स्टडी: अधिक आक्रामक ट्यूमर भी बढ़ रहे हैं

2000–2017 के बीच 69,000+ मरीज़ों की स्टडी में पाया गया कि:

मामलों में भी बढ़ोतरी

मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी

ट्यूमर के आकार या स्टेज से सीधा संबंध नहीं

यह संकेत देता है कि सिर्फ छोटे ट्यूमर की पहचान बढ़ने से मामलों में वृद्धि की व्याख्या नहीं होती।

किताहारा की 77,000 मरीज़ों पर आधारित 1974–2013 की एक अन्य स्टडी में पाया गया कि:

मेटास्टेटिक (फैलने वाले) कैंसर भी बढ़ रहे हैं

मौतों में हर साल 1.1% वृद्धि हो रही है

उनका कहना है:

“अधिक आक्रामक ट्यूमर बढ़ने के पीछे कोई और अनदेखा कारण ज़रूर है।”

निष्कर्ष

थायरॉइड कैंसर का तेजी से बढ़ना अब सिर्फ़ बेहतर जांच के कारण नहीं माना जा सकता। वैज्ञानिकों के अनुसार,

पर्यावरणीय बदलाव,

जीवनशैली कारक,

केमिकल एक्सपोज़र,

और आनुवंशिक कारणों की संभावित भूमिका की गहन जांच की आवश्यकता है।

थायरॉइड कैंसर की वैश्विक बढ़ोतरी अब एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है।

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