बिहार की सियासत में एक बार फिर पारदर्शिता का बड़ा कदम देखने को मिला है। राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों—मुख्य सचिव से लेकर डीजीपी और ग्रुप-डी कर्मियों तक—सभी की संपत्ति का पूरा ब्योरा ऑनलाइन जारी कर दिया है। इस फैसले को जवाबदेही और सुशासन की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की संपत्ति का ब्यौरा
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की संपत्ति का विश्लेषण करें तो उनके परिवार की आर्थिक स्थिति संतुलित और व्यवस्थित नजर आती है। उनकी पत्नी के नाम पर करीब एक किलो सोना और लगभग तीन किलो चांदी के जेवरात दर्ज हैं। इसके अलावा बैंक खातों में करोड़ों रुपये की जमा-पूंजी, म्यूचुअल फंड और पीपीएफ में निवेश भी शामिल है। एसबीआई के पीपीएफ खाते में ही करीब 3.15 करोड़ रुपये जमा बताए गए हैं।
हालांकि, नकद राशि के मामले में सादगी देखने को मिलती है। मुख्य सचिव के पास मात्र 15,400 रुपये और उनकी पत्नी के पास 10,408 रुपये नकद हैं। साथ ही करीब 79 लाख रुपये का कर्ज भी है, जो किसी विलासिता के लिए नहीं बल्कि बच्चे की शिक्षा के लिए लिया गया एजुकेशन लोन है।
अचल संपत्ति की बात करें तो गुरुग्राम में 1500 वर्गफीट का फ्लैट और मुजफ्फरपुर में जमीन उनकी संपत्ति में शामिल है।
DGP विनय कुमार की संपत्ति का विवरण
बिहार पुलिस के मुखिया डीजीपी विनय कुमार की आर्थिक तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है। उनके पास नकद राशि नहीं है, लेकिन बैंक खातों में 30 लाख 6 हजार रुपये से अधिक की जमा राशि है। इसके अलावा लगभग 2 लाख रुपये टर्म डिपॉजिट में निवेश किए गए हैं।
उनके पास एक हुंडई i10 कार है, जो उनकी सादगी और व्यावहारिकता को दर्शाती है। सोने-चांदी के रूप में उनके पास करीब 525 ग्राम सोना और लगभग डेढ़ किलो चांदी है।
पत्नी के नाम अधिक संपत्ति
दिलचस्प बात यह है कि डीजीपी से ज्यादा संपत्ति उनकी पत्नी के नाम पर दर्ज है। बिहटा में 3020 वर्गफीट जमीन उनकी पत्नी के नाम है, जबकि खुद विनय कुमार के नाम अनीशाबाद पुलिस कॉलोनी में 2000 वर्गफीट जमीन दर्ज है। इसके अलावा नोएडा में करीब 44 लाख रुपये का फ्लैट भी उनकी संपत्ति में शामिल है।
हालांकि, उनके ऊपर भी लगभग 42 लाख रुपये का कर्ज है, जो यह दिखाता है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारी भी वित्तीय जिम्मेदारियों से अछूते नहीं हैं।
पारदर्शिता की ओर बड़ा कदम
बिहार सरकार का यह फैसला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे न केवल सरकारी अधिकारियों की आर्थिक स्थिति स्पष्ट होती है, बल्कि आम जनता का भरोसा भी शासन-प्रशासन पर मजबूत होता है।
कुल मिलाकर, यह कदम सुशासन की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें जनता के प्रति जवाबदेही को सर्वोपरि रखा गया है।















