बिहार में वेतन और पेंशन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसने सियासी माहौल को गरमा दिया है। जानकारी के मुताबिक, राज्य के करीब 10 प्रतिशत सरकारी कर्मचारियों को अब तक मार्च महीने का वेतन नहीं मिल पाया है। वहीं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत आने वाले 1 करोड़ से अधिक लाभार्थी—जिनमें बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग शामिल हैं—भी अपनी पेंशन का इंतजार कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कुल मिलाकर 1.15 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को मार्च की पेंशन अभी तक नहीं मिली है। यह वही वर्ग है, जिसकी रोजमर्रा की जरूरतें इस राशि पर निर्भर करती हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि अगले 2-3 दिनों में DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए यह राशि सीधे खातों में भेज दी जाएगी।
इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य का खजाना खाली हो चुका है, इसलिए कर्मचारियों और पेंशनधारियों को समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंत्रियों और विधायकों तक को वेतन में देरी हुई है।
वहीं, उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति पूरी तरह मजबूत है और जनप्रतिनिधियों को उनका वेतन समय पर मिल चुका है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पेंशन और वेतन की राशि जल्द ही जारी कर दी जाएगी।
फिलहाल, यह मामला सियासी बयानबाजी के बीच उलझा हुआ है। लेकिन असली असर उन लाखों लोगों पर पड़ रहा है, जो हर महीने मिलने वाली इस राशि पर अपनी जिंदगी चलाते हैं। आने वाले कुछ दिनों में स्थिति साफ होने की उम्मीद है कि यह तकनीकी देरी है या वाकई वित्तीय दबाव का संकेत।














