बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद मुजफ्फरपुर में शराब तस्करी का खेल लगातार जारी है। हालांकि इस बार उत्पाद विभाग की सख्त कार्रवाई ने तस्करों की पूरी चालाकी को बेनकाब कर दिया। एक ही दिन में दो अलग-अलग जगहों पर हुई कार्रवाई में भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की गई और तस्करी के बड़े नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।
मामले की शुरुआत एक गुप्त सूचना से हुई, जिसमें बताया गया कि उत्तर प्रदेश से एक लग्ज़री कार के जरिए विशेष तरीके से शराब की खेप मुजफ्फरपुर लाई जा रही है। सूचना मिलते ही उत्पाद विभाग की टीम ने सरैया थाना क्षेत्र के रेवा पुल के पास घेराबंदी कर दी। करीब चार घंटे तक इंतजार के बाद जैसे ही संदिग्ध गाड़ी वहां पहुंची, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे रोक लिया।
तलाशी के दौरान जो सामने आया, वह चौंकाने वाला था। गाड़ी के फर्श में बेहद चालाकी से एक गुप्त तहखाना बनाया गया था, जिसमें ड्राइवर सीट से लेकर डिक्की तक शराब की पेटियां छुपाकर रखी गई थीं। मौके पर ही दो तस्करों—आदित्य कुमार और कृष्णा यादव—को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। फिलहाल उनसे पूछताछ कर तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
इसी दौरान दूसरी बड़ी कार्रवाई कांटी थाना क्षेत्र के डेहमा गांव में की गई। यहां छापेमारी के दौरान एक पुलिया के नीचे छिपाकर रखी गई 112 कार्टन विदेशी शराब बरामद की गई। आशंका जताई जा रही है कि इस शराब को रात के अंधेरे में ट्रक से उतारकर सुरक्षित स्थान के रूप में यहां छुपाया गया था, ताकि बाद में इसे छोटे वाहनों के जरिए सप्लाई किया जा सके।
उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर विशेष टीमों का गठन कर लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शराब तस्करों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सघन अभियान चलाया जाएगा और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
इस डबल कार्रवाई के बाद मुजफ्फरपुर में शराब माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया है। हालांकि सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर शराबबंदी के बावजूद यह अवैध कारोबार कब तक जारी रहेगा।














