बेगूसराय जिले के ग्रामीण इलाकों में नीलगाय का आतंक लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। खेतों में झुंड के रूप में घुसकर नीलगायें किसानों की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुँचा रही हैं। आलम यह है कि कई गांवों में किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो जा रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है।
पीड़ित किसानों का कहना है कि वे अधिकांशतः जमीन रेंट पर लेकर खेती करते हैं। बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई पर भारी खर्च करने के बावजूद नीलगायों के कारण पूरी फसल नष्ट हो जा रही है। ऐसे में न तो खेती में लगाई गई लागत निकल पा रही है और न ही परिवार का सही ढंग से भरण-पोषण हो पा रहा है। किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे नुकसान ने उन्हें मानसिक रूप से भी परेशान कर दिया है।
कई किसानों ने आशंका जताई कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में उन्हें खेती छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा। मजबूरी में रोज़गार की तलाश में हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों की ओर पलायन करना उनकी मजबूरी बन जाएगी। इसके साथ ही खेती के लिए लिया गया कर्ज और जमीन का किराया चुकाना भी उनके लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय नीलगायों का झुंड खेतों में घुस आता है और पूरी फसल चर जाता है। किसान पहरा देने की कोशिश करते हैं, लेकिन जान का खतरा होने के कारण वे नीलगायों को रोक पाने में असमर्थ हैं। कई जगहों पर खेतों की मेड़ और तारबंदी भी नीलगायों के सामने बेअसर साबित हो रही है।
पीड़ित किसानों ने बिहार सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि नीलगायों से फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएँ। किसानों ने फसल सुरक्षा के लिए उचित मुआवजा, मजबूत बाड़बंदी, सामूहिक समाधान और वन विभाग की सक्रिय भूमिका की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो जिले में खेती करना किसानों के लिए असंभव हो जाएगा।
कुल मिलाकर बेगूसराय में नीलगाय का बढ़ता आतंक किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब और क्या कदम उठाते हैं।
अजय शास्त्री की रिपोर्ट
















