मोकामा में केंद्र सरकार के अधीन आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बंद पड़े उद्योगों की जमीन को बिहार सरकार द्वारा अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह घोषणा मंगलवार को बिहार विधान परिषद में उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने की।
दरअसल, जदयू के विधान पार्षद नीरज कुमार ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सदन में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार विभिन्न जिलों में जमीन अधिग्रहित कर रही है, लेकिन कई ऐसे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग हैं जो वैश्वीकरण और नई आर्थिक नीति लागू होने के बाद बंद हो गए।
नीरज कुमार ने कहा कि नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन (मुजफ्फरपुर) और भारत वैगन (मोकामा) जैसी इकाइयों की जमीन आज भी खाली पड़ी है। उन्होंने बताया कि इन जगहों पर बाउंड्री वॉल, आधारभूत संरचना और जमीन उपलब्ध होने के बावजूद प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने अन्य बंद उद्योगों जैसे कटिहार जूट मिल और डालमिया नगर मिल का भी जिक्र किया और सरकार से गंभीर पहल की मांग की।
सरकार की प्रतिक्रिया और योजना
उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि मोकामा अंचल में करीब 40 एकड़ जमीन उपलब्ध है, जिसमें भारत वैगन की जमीन भी शामिल है। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार इस जमीन को केंद्र सरकार से लेने और वहां उद्योग स्थापित करने के उद्देश्य से पत्र लिखेगी। साथ ही राज्य सरकार ऐसी अन्य जमीनों के लिए भी केंद्र सरकार से समन्वय करेगी।
मंत्री ने बताया कि बिहार सरकार औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहित कर रही है, जिनमें प्रमुख जिलों की उपलब्ध जमीन इस प्रकार है:
- सीतामढ़ी: 504 एकड़
- वैशाली: 1243 एकड़
- मधुबनी: 712 एकड़
- रोहतास: 17 एकड़
- शिवसागर: 492 एकड़
- नवादा: 139 एकड़
- अरवल: 30 एकड़
- नालंदा: 524 एकड़
- मुंगेर: 466 एकड़
- भागलपुर: 13 एकड़
- कटिहार: 252 एकड़
- औरंगाबाद (कुटुंबा): 441 एकड़
- मुजफ्फरपुर: 700 एकड़
- सुपौल: 498 एकड़
- सिवान: 60 एकड़
मंत्री ने कहा कि इसी क्रम में मोकामा की बंद पड़ी भारत वैगन की जमीन को भी अधिग्रहित करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र भेजा जाएगा। इस पहल से बिहार में औद्योगिक निवेश को नया impulso मिलेगा और बेरोज़गारी कम करने में मदद मिलेगी।















