हाजीपुर।
मां की ममता एक बार फिर कटघरे में खड़ी नजर आई है। जिस नवजात को मां की गोद की गर्माहट और सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वही मासूम सर्द रात की बेरहम ठंड से जूझते हुए जिंदगी की जंग हार गया। हरिहरनाथ ओपी क्षेत्र के आनंदपुर गांव से सामने आई यह हृदयविदारक घटना इंसानियत की रूह को झकझोर देने वाली है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बीती रात करीब दस बजे से सड़क किनारे किसी नवजात के रोने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। अंधेरी रात में मासूम की कराहती पुकार लगातार गूंजती रही, लेकिन डर, ठंड और किसी अनहोनी की आशंका के कारण कोई बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सका। पूरी रात वह नन्हा जीवन खुले आसमान के नीचे ठंड से लड़ता रहा।
सुबह मिली मौत की खामोशी
सुबह जब ग्रामीणों की नजर सड़क किनारे पड़ी, तो वहां का दृश्य देखकर हर कोई सन्न रह गया। नवजात की निश्चल देह ठंड से अकड़ी हुई पड़ी थी। मासूम की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में मातम पसर गया। लोगों की आंखें नम थीं और हर चेहरा सवालों से भरा हुआ था।
पुलिस ने शव भेजा पोस्टमार्टम के लिए
घटना की सूचना मिलते ही हरिहरनाथ ओपी की पुलिस मौके पर पहुंची। नवजात के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, हाजीपुर भेज दिया गया है। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि ठंड के असर ने मासूम की देह को पूरी तरह जकड़ लिया था, जिसे देखकर हर किसी का दिल पसीज गया।
2–3 दिन पहले हुआ था जन्म, अवैध गर्भधारण की आशंका
हरिहरनाथ ओपी में तैनात दरोगा शैलेंद्र माझी ने बताया कि स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार रात करीब दस बजे से बच्चे के रोने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। सुबह इसकी सूचना पुलिस को दी गई। प्रारंभिक जांच में अनुमान है कि नवजात का जन्म दो से तीन दिन पहले हुआ होगा।
पुलिस को आशंका है कि किसी महिला ने अवैध गर्भधारण के कारण सामाजिक बदनामी, लोकलाज और भय के चलते बच्चे को जन्म देने के बाद सड़क किनारे छोड़ दिया होगा, जिससे ठंड के कारण उसकी मौत हो गई।
समाज और सिस्टम पर खड़े हुए सवाल
यह घटना सिर्फ एक नवजात की मौत नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं पर भी बड़ा सवाल है। क्या सामाजिक डर और बदनामी मां की ममता से बड़ी हो गई? क्या मजबूरी और भय ने एक मां को इतना बेबस कर दिया कि उसने अपने ही कलेजे के टुकड़े को मौत के हवाले कर दिया?

जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। आसपास के गांवों और इलाकों में पूछताछ की जा रही है, ताकि उस महिला की पहचान हो सके जिसने नवजात को सड़क किनारे छोड़ा। पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह दर्दनाक घटना एक बार फिर समाज और प्रशासन दोनों के सामने यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक मासूम जिंदगियां हमारी लापरवाही, डर और संवेदनहीनता की बलि चढ़ती रहेंगी।

















