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तेज रफ्तार एम्बुलेंस बनी मौत का फरमान, मोतीहारी में आधा दर्जन लोगों को रौंदा, 16 वर्षीय किशोर की मौके पर मौत

बिहार की सड़कों पर शुक्रवार की शाम वह मंजर उभरा, जिसने इंसानियत और सिस्टम—दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया। मोतीहारी जिले के छौड़ादानो थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार एम्बुलेंस ने सड़क पर चलते लोगों के लिए मौत बनकर दस्तक दी।

जनता चौक से नहर रोड जाने वाली सड़क पर बेकाबू एम्बुलेंस ने आधा दर्जन राहगीरों को रौंद डाला। इस दर्दनाक हादसे में 16 वर्षीय किशोर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर हालत में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

मृतक की पहचान भेलवा गांव निवासी उमाशंकर राम के पुत्र कुणाल कुमार के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे एम्बुलेंस छौड़ादानो प्रखंड मुख्यालय की ओर से जनता चौक की तरफ तेज और बेकाबू रफ्तार में आ रही थी।

चश्मदीदों का कहना है कि एम्बुलेंस की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, लेकिन किस्मत ने कुणाल को मौका नहीं दिया। एम्बुलेंस ने उसे कुचल दिया और मौके पर ही उसकी सांसें थम गईं

इस हादसे में मृतक का चचेरा भाई आकाश कुमार (14 वर्ष) भी गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे बेहतर इलाज के लिए मोतिहारी रेफर किया गया है। अन्य घायलों की हालत भी नाजुक बताई जा रही है।

हादसे के बाद सड़क पर खून, चीख-पुकार और अफरातफरी का मंजर ऐसा था कि पूरा इलाका दहशत में डूब गया। घटना से गुस्साए लोगों ने कटहड़िया गांव निवासी एम्बुलेंस चालक को मौके पर ही पकड़ लिया और जमकर धुनाई कर दी। हालात इतने बिगड़ गए कि चालक की जान पर बन आई।

सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष प्रभात कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस को भीड़ से चालक को बचाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। आक्रोशित लोग चालक को उनके हवाले करने की मांग कर रहे थे।

पुलिस ने घायलों को तत्काल स्थानीय पीएचसी पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने कुणाल कुमार को मृत घोषित कर दिया। एम्बुलेंस चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है।

फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि

  • एम्बुलेंस में मरीज मौजूद था या नहीं
  • इतनी तेज रफ्तार क्यों थी
  • चालक लापरवाही में था या नियमों की अनदेखी की गई

अपराध की जुबान में देखें तो यह महज हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही की वह वारदात है, जिसने एक घर का चिराग बुझा दिया। अब बड़ा सवाल यही है—
क्या सायरन की आड़ में मौत यूं ही दौड़ती रहेगी, या किसी दिन रफ्तार पर कानून की लगाम भी कसेगी?

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