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मुंगेर में बड़ा खुलासा: स्वास्थ्य उप-केंद्र से ग्रामीणों को बांटी गई एक्सपायरी दवाएं, जांच के आदेश

MUNGER: जिले के जमालपुर प्रखंड अंतर्गत हालिमपुर गौरीपुर स्वास्थ्य उप-केंद्र (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां तैनात स्वास्थ्य कर्मियों पर ग्रामीणों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगा है।

जानकारी के अनुसार, घर-घर जाकर दवा वितरण के दौरान ग्रामीणों को ऐसी दवाएं दे दी गईं, जिनकी एक्सपायरी डेट कई महीने पहले ही समाप्त हो चुकी थी। मामले के सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश और हड़कंप मच गया है।

स्वास्थ्य कर्मियों पर गंभीर आरोप

ग्रामीणों के मुताबिक, उप-केंद्र में कार्यरत सीएचओ (CHO) रिबिका कुमारी, एएनएम (ANM) निहारिका कुमारी और जीएनएम (GNM) प्रीति कुमारी नियमित जांच के नाम पर गांवों का दौरा कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने बुखार, दर्द और संक्रमण से संबंधित दवाएं वितरित कीं।

हालांकि, जब कुछ जागरूक ग्रामीणों ने दवा के पैकेट पर अंकित निर्माण और एक्सपायरी तिथि की जांच की, तो पता चला कि कई दवाओं की वैधता 6 से 12 महीने पहले ही खत्म हो चुकी थी

ग्रामीणों में आक्रोश

गांव की महिलाओं का कहना है कि उन्होंने सरकारी अस्पताल की दवा समझकर इन दवाओं को सुरक्षित माना था। लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों ने एक्सपायरी डेट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह इस स्वास्थ्य उप-केंद्र की पहली गलती नहीं है, बल्कि पहले भी ऐसी लापरवाही की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। लोगों का कहना है कि अगर किसी ने इन एक्सपायरी दवाओं का सेवन कर लिया होता, तो किसी की जान को खतरा हो सकता था

स्वास्थ्य विभाग हरकत में

मामला सामने आने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है।

प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. रमन कुमार ने बताया कि उन्हें इस गंभीर मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। उन्होंने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है और ऐसी लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जांच टीम गठित

स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम का गठन कर दिया है। प्रभारी सिविल सर्जन ने बताया कि जांच टीम जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

यदि जांच में सीएचओ, एएनएम और जीएनएम की लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विभाग यह भी जांच कर रहा है कि स्वास्थ्य उप-केंद्र के स्टॉक में कितनी एक्सपायरी दवाएं मौजूद थीं और वे वितरण प्रणाली तक कैसे पहुंचीं

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