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बिहार में बेटी की कीमत 20 हजार! मुजफ्फरपुर में 6 साल की बच्ची की खरीद-फरोख्त का खुलासा, सिस्टम पर उठे सवाल

मुजफ्फरपुर। सरकार भले ही मंचों से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे बुलंद कर रही हो, लेकिन बिहार की ज़मीनी हकीकत आज भी इन दावों को आईना दिखा रही है। सूबे में आज भी मासूम बच्चियों की कीमत महज 20 हजार रुपये लगाई जा रही है। यह कोई आरोप या अफवाह नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर जिले में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद सामने आई एक छह साल की बच्ची की दर्दनाक दास्तान है, जिसने समाज और सिस्टम—दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

यह पूरा मामला मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र के मझौलिया गांव का है। चाइल्ड हेल्पलाइन से मिली सूचना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक छह वर्षीय मासूम बच्ची को रेस्क्यू किया। जांच के दौरान जो सच्चाई सामने आई, वह न सिर्फ झकझोर देने वाली है, बल्कि बाल संरक्षण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

पुलिस जांच में सामने आया कि बच्ची को गोद लेने के नाम पर 20 हजार रुपये में खरीदा गया था। इस पूरे सौदे में एक चाय बेचने वाली महिला ने बिचौलिये की भूमिका निभाई। बच्ची के पिता का कुछ वर्ष पहले निधन हो चुका था। इसके बाद मां चारों बच्चों को छोड़कर उत्तर प्रदेश चली गई और दूसरी शादी कर ली। मां के चले जाने के बाद बच्चों की जिम्मेदारी नानी और मामा पर आ गई, जिनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही बेहद कमजोर थी।

इसी मजबूरी का फायदा उठाकर वर्ष 2025 में एक दंपती ने भरथीपुर इलाके में चाय बेचने वाली महिला के माध्यम से बच्ची को 20 हजार रुपये में अपने साथ ले लिया। शुरुआत में इसे गोद लेने का नाम दिया गया, लेकिन न तो कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई और न ही किसी तरह की सरकारी अनुमति ली गई।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, दंपती के घर में बच्ची को पिता जैसा स्नेह तो मिला, लेकिन मां का दुलार नहीं। आरोप है कि महिला लगातार बच्ची के साथ मारपीट करती थी। बच्ची कई बार घर से भागकर बाहर भटकती हुई नजर आई। स्थानीय लोगों ने पहले मामले को समझा-बुझाकर दबाने की कोशिश की, लेकिन हालात जस के तस बने रहे।

जब बच्ची एक बार फिर भटकती हुई दिखाई दी, तो स्थानीय लोगों ने चाइल्ड हेल्पलाइन को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही सकरा थाना पुलिस हरकत में आई और बच्ची को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। फिलहाल बच्ची को संरक्षण में रखा गया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

पुलिस अब इस पूरे मामले में शामिल नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। बिचौलिया महिला, बच्ची को खरीदने वाला दंपती और संभावित बाल तस्करी गिरोह के लिंक खंगाले जा रहे हैं। संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

यह मामला सिर्फ एक मासूम बच्ची की त्रासदी नहीं है, बल्कि उस सामाजिक और सियासी व्यवस्था पर भी करारा तमाचा है, जहां योजनाओं और नारों की गूंज तो खूब सुनाई देती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर बच्चियों की सुरक्षा आज भी सवालों के घेरे में है। यह घटना बताती है कि जब तक निगरानी, संवेदनशीलता और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे काले सौदे यूं ही मासूम जिंदगियों को निगलते रहेंगे।

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