पटना जिले के मोकामा और उसके आसपास का इलाका एक बार फिर अपराध, दहशत और पुलिस कार्रवाई की बड़ी कहानी के केंद्र में आ गया है। नौरंगा जलालपुर गोलीकांड के बाद कुख्यात अपराधी सोनू सिंह और उसके गैंग के खिलाफ बिहार पुलिस ने व्यापक अभियान छेड़ दिया है। पुलिस की कई टीमें लगातार अलग-अलग जिलों में छापेमारी कर रही हैं, लेकिन अब तक आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की रणनीति और खुफिया तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
नौरंगा जलालपुर गोलीकांड से मचा हड़कंप
पूरा मामला पंचमहला थाना क्षेत्र के नौरंगा जलालपुर गांव का है, जहां 24 मई को हुई गोलीबारी की घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। बताया जा रहा है कि गांव में किसी बात को लेकर सरपंच पति और मुखिया पति प्रमोद सिंह के बीच विवाद हुआ था। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि कुख्यात अपराधी सोनू कुमार ने हवाई फायरिंग शुरू कर दी।
घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया। मामले में पैक्स अध्यक्ष मुकेश सिंह के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें सोनू सिंह, उसके पिता प्रमोद सिंह और सौरव सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया है। केस दर्ज होने के बाद से ही आरोपी फरार चल रहे हैं।
तीन डीएसपी और STF को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस हाई-प्रोफाइल मामले को देखते हुए पुलिस ने बड़े स्तर पर ऑपरेशन शुरू किया है। सूत्रों के अनुसार तीन डीएसपी के नेतृत्व में तीन अलग-अलग विशेष टीमें बनाई गई हैं। इसके अलावा स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की एक यूनिट को भी इस मिशन में लगाया गया है।
पुलिस का मुख्य उद्देश्य किसी भी हालत में सोनू सिंह गैंग तक पहुंचना और उसे गिरफ्तार करना है। इसके लिए पुलिस लगातार तकनीकी निगरानी, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और खुफिया इनपुट के आधार पर कार्रवाई कर रही है।
आठ जिलों में चल रहा छापेमारी अभियान
पुलिस को सूचना मिली थी कि गोलीकांड के बाद सोनू सिंह बिहार से बाहर भागने की कोशिश कर सकता है। इसके बाद सीमावर्ती इलाकों में भी सघन जांच अभियान शुरू किया गया। पुलिस की छापेमारी फिलहाल छपरा, सीवान, मोतिहारी, कटिहार, गया, गोपालगंज, समस्तीपुर और बेगूसराय समेत कई जिलों में जारी है।
इसके अलावा गांव और आसपास के क्षेत्रों में कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ भी की गई है। हालांकि अभी तक पुलिस को कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है। लगातार हो रही पुलिस कार्रवाई से इलाके में तनाव और खामोशी का माहौल बना हुआ है।
18 साल से अपराध की दुनिया में सक्रिय गैंग
जानकारी के अनुसार सोनू सिंह और उसका भाई मोनू सिंह पिछले लगभग 18 वर्षों से अपराध की दुनिया में सक्रिय हैं। शुरुआत छोटे अपराधों से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे दोनों भाइयों ने अपना संगठित आपराधिक नेटवर्क तैयार कर लिया।
इनका पहला बड़ा मामला वर्ष 2009 में मोकामा रेल थाना क्षेत्र में दर्ज लूटकांड माना जाता है। इसके बाद इन दोनों का नाम लगातार विभिन्न आपराधिक घटनाओं में सामने आने लगा। लखीसराय, बेगूसराय और पटना के कई इलाकों में लूट, रंगदारी, अपहरण और आर्म्स एक्ट के मामलों में इनकी संलिप्तता दर्ज की गई।
30 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सोनू-मोनू गैंग पर वर्तमान में 30 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें अपहरण, लूट, रंगदारी, फायरिंग और अवैध हथियार रखने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
वर्ष 2019 में मनरेगा के एक अधिकारी के अपहरण का मामला भी काफी चर्चित रहा था। उस समय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकारी को सुरक्षित बरामद कर लिया था। इसके बावजूद गैंग की गतिविधियां लगातार जारी रहीं और उनका नेटवर्क और मजबूत होता गया।
कई थाना क्षेत्रों में फैला नेटवर्क
मोकामा, बाढ़, खुसरूपुर, कंकड़बाग, हाथीदह, पंचमहला, बड़हिया और हलसी जैसे कई थाना क्षेत्रों में इस गैंग की सक्रियता लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। पुलिस का मानना है कि गैंग को स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों का समर्थन भी मिल रहा है, जिसकी वजह से आरोपी बार-बार गिरफ्तारी से बच निकलते हैं।
ग्रामीणों में डर, पुलिस का दावा जल्द होगी गिरफ्तारी
नौरंगा जलालपुर गोलीकांड के बाद ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ है। लोग खुले तौर पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वहीं पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे और पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
फिलहाल बिहार पुलिस इस पूरे मामले को हाई रिस्क ऑपरेशन मानकर चल रही है। लगातार छापेमारी और दबिश के बावजूद कुख्यात सोनू सिंह अब तक फरार है, जिसने पूरे इलाके को एक बार फिर डर और खौफ की छाया में धकेल दिया है।















