पटना हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवादों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल संदेह या अस्पष्ट आरोपों के आधार पर पत्नी पर अवैध संबंध का आरोप लगाकर तलाक नहीं लिया जा सकता। अदालत ने कहा कि व्यभिचार जैसे गंभीर आरोप साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य, स्पष्ट तथ्य और पर्याप्त विवरण आवश्यक हैं।
जस्टिस Nani Tagia और जस्टिस Alok Kumar Pandey की खंडपीठ ने श्याम बिहारी मिश्रा की अपील खारिज करते हुए सिवान फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
दरअसल, पति ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी तलाक याचिका को खारिज कर दिया गया था। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी संजू देवी का किसी अन्य व्यक्ति से संबंध है और वह बिना बताए घर से बाहर जाती थी। उसने यह भी दावा किया कि पत्नी को एक युवक के साथ सिनेमा हॉल से बाहर निकलते देखा गया था।
हालांकि, हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिका में लगाए गए आरोपों से जुड़े जरूरी तथ्य स्पष्ट नहीं थे। अदालत ने कहा कि कथित व्यक्ति का नाम, घटना का समय, स्थान और अन्य महत्वपूर्ण विवरण याचिका में नहीं दिए गए। इतना ही नहीं, जिस व्यक्ति पर संबंध का आरोप लगाया गया, उसे मामले में पक्षकार भी नहीं बनाया गया।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बाद में गवाही के दौरान जोड़े गए तथ्यों के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने माना कि केवल आशंका और अनुमान के आधार पर किसी के चरित्र पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
अदालत के इस फैसले को वैवाहिक मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी माना जा रहा है, जिसमें यह संदेश दिया गया है कि गंभीर आरोपों के लिए पुख्ता साक्ष्य होना जरूरी है।

















