पटना हाईकोर्ट ने बक्सर जिले के परमानपुर मौजा स्थित सार्वजनिक तालाब, आहर-पईन और जलनिकासी संरचनाओं पर हुए कथित अतिक्रमण को लेकर जिला प्रशासन को कड़ा निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि चार सप्ताह के भीतर सभी अवैध कब्जों को हटाया जाए और रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
यह आदेश एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह की खंडपीठ ने सुरेंद्रनाथ तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ता का आरोप: तालाब व आहर-पईन पर अवैध कब्जा
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि
मौजा परमानपुर (राजस्व थाना संख्या 441) स्थित सार्वजनिक तालाब,
उससे जुड़े आहर-पईन,
और जलनिकासी व्यवस्था
पर स्थानीय लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। इन जल स्त्रोतों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है और जल भराव तथा पर्यावरणीय असंतुलन की आशंका बढ़ रही है।
डीएम और एसडीओ को दी गई थी जानकारी, पर कार्रवाई नहीं हुई
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंजू मिश्रा ने बताया कि इस संबंध में
बक्सर के जिलाधिकारी,
और डुमराव के एसडीओ
को लिखित रूप से सूचित कर कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन मामले में कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई।
उन्होंने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि जिला प्रशासन एक स्थायी तंत्र तैयार करे, ताकि भविष्य में इन जल स्रोतों पर दोबारा अतिक्रमण न हो सके।
कोर्ट ने कहा: जल स्रोतों की सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि—
“सार्वजनिक जल स्रोतों की रक्षा सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”
कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि
चार सप्ताह में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी करें,
आवश्यकता होने पर पुलिस अधीक्षक से बल उपलब्ध कराने का अनुरोध करें,
और इसकी प्रगति रिपोर्ट कोर्ट को प्रस्तुत करें।
चार सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई
कोर्ट ने आगे की सुनवाई के लिए मामले को चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। अब निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई और उसकी रिपोर्ट पर टिकी रहेंगी।














