नई दिल्ली। भारतीय राजनीति के इतिहास में 10 जून 2026 का दिन एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देश के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru का सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड पीछे छोड़ते हुए नया इतिहास रच दिया है।
26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 4399 दिन पूरे हो चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि मोदी लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता की कमान संभाल रहे हैं।
पिछले वर्ष 9 जून 2024 को उन्होंने National Democratic Alliance (एनडीए) सरकार के तीसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके साथ ही केंद्र में उनके नेतृत्व के 12 वर्ष भी पूरे हो चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी और एनडीए इस उपलब्धि को सुशासन, विकास और स्थिर नेतृत्व की पहचान के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
दरअसल, स्वतंत्रता के बाद 15 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन उस समय वे अंतरिम सरकार के प्रमुख थे। स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव के बाद 13 मई 1952 से लेकर 27 मई 1964 तक वे लगातार 4398 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में पद पर रहे। सात दशकों से अधिक समय तक कायम यह रिकॉर्ड अब नरेंद्र मोदी के नाम दर्ज हो गया है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी क्रम में एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक अहम बैठक बुलाई गई है। बैठक में N. Chandrababu Naidu द्वारा एक विशेष प्रस्ताव पेश किए जाने की चर्चा है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल, विकास योजनाओं, आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढांचे के विस्तार और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रिकॉर्ड केवल कार्यकाल की अवधि का आंकड़ा नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में लगातार मिले जनादेश और नेतृत्व की निरंतरता का भी प्रतीक है। वहीं विपक्ष इस उपलब्धि को ऐतिहासिक मानते हुए भी सरकार की नीतियों और प्रदर्शन पर सवाल उठाने की अपनी रणनीति जारी रखे हुए है।
बहरहाल, नरेंद्र मोदी का नेहरू का रिकॉर्ड पार करना भारतीय राजनीति में एक बड़े प्रतीकात्मक क्षण के रूप में देखा जा रहा है। अब देश की निगाहें तीसरे कार्यकाल में सरकार की नई प्राथमिकताओं, नीतिगत फैसलों और आने वाले वर्षों में बनने वाले संभावित नए रिकॉर्डों पर टिकी हैं।


















