पटना।
बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही 18 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला अब केवल एक संदिग्ध मौत नहीं, बल्कि इंसानियत को शर्मसार करने वाली घिनौनी वारदात के रूप में सामने आ रहा है। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, जो अब वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अपराध की परतें खोलने में जुटी है। जांच में अब तक कुल 25 संदिग्धों के ब्लड सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनका डीएनए मिलान घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट से किया जाएगा।
जांच के दायरे में हॉस्टल संचालिका के बेटे आशु अग्रवाल और हॉस्टल मालिक मनीष रंजन के बेटे को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा मृतका के करीबी दोस्तों, हॉस्टल परिसर से जुड़े युवाओं और वहां काम करने वाले सभी पुरुष कर्मचारियों पर भी पुलिस की कड़ी नजर है। एसआईटी उन लोगों की भी जांच कर रही है, जिन्होंने छात्रा को बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचाया था।
फॉरेंसिक लैब से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मृतका के कपड़ों और अंडरगारमेंट्स पर मानव स्पर्म के नमूने पाए गए हैं। प्रारंभिक फॉरेंसिक विश्लेषण में संकेत मिला है कि संदिग्ध आरोपी की उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच हो सकती है। यह सुराग जांच में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि अब पुलिस का फोकस उन युवाओं पर केंद्रित हो गया है, जो हाल के दिनों में छात्रा के संपर्क में थे।
एसआईटी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी एक संदिग्ध पर अंतिम रूप से मुहर नहीं लगी है, लेकिन डीएनए प्रोफाइलिंग के जरिए अपराधी की पहचान लगभग तय मानी जा रही है। डीएनए जांच एक अत्यंत वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो किसी व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना का सटीक विश्लेषण करती है और आपराधिक मामलों में 99.9 प्रतिशत से अधिक सटीक परिणाम देती है।
एफएसएल द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि मृतका के कपड़ों पर पाए गए नमूने मानव स्पर्म के हैं, जिससे परिजनों के दुष्कर्म के आरोपों को मजबूती मिली है। अब इन नमूनों का संदिग्धों के डीएनए से मिलान किया जा रहा है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि इस प्रक्रिया के बाद आरोपी का बच पाना मुश्किल होगा।
पटना की इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था और छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, एसआईटी और एफएसएल की वैज्ञानिक जांच से अब उम्मीद जगी है कि इस जघन्य अपराध में शामिल दोषियों को जल्द ही बेनकाब किया जाएगा और उन्हें कानून के कठघरे में खड़ा किया जाएगा।
इस केस की हर कड़ी अब डीएनए के वैज्ञानिक जाल में फंस रही है, और माना जा रहा है कि सच्चाई ज्यादा देर तक छुपी नहीं रह पाएगी।


















