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गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर नहीं दिखेगी बिहार की झांकी, रोटेशन नीति बनी वजह

पटना/नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 26 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार बिहार की झांकी नजर नहीं आएगी। इसके चलते बिहारवासियों को इस वर्ष अपने राज्य की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और विकासात्मक झलक राष्ट्रीय मंच पर देखने का अवसर नहीं मिल पाएगा।

दरअसल, गणतंत्र दिवस पर होने वाले राष्ट्रीय समारोह में झांकियों के चयन को लेकर इस बार रक्षा मंत्रालय की रोटेशन नीति को लागू किया गया है। इसी नीति के तहत बिहार को इस वर्ष झांकी प्रस्तुत करने का मौका नहीं मिला। बिहार सूचना विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन वर्षों की अवधि में कम से कम एक बार झांकी प्रस्तुत करने का अवसर देने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है।

गौरतलब है कि लगभग नौ साल के लंबे अंतराल के बाद वर्ष 2025 में बिहार की झांकी कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित की गई थी, जिससे राज्य में यह उम्मीद जगी थी कि आने वाले वर्षों में भी बिहार की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय मंच पर देखने को मिलेगी। हालांकि इस वर्ष एक बार फिर बिहार को झांकियों की सूची से बाहर रखा गया है।

इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह की थीम ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर आधारित है। इस अवसर पर कुल 30 झांकियां प्रदर्शित की जाएंगी, जो देश की एकता, आत्मनिर्भरता और समावेशी राष्ट्रीय प्रगति का संदेश देंगी।

झांकी प्रस्तुत करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, नगालैंड, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और पंजाब शामिल हैं।

इसके अलावा विभिन्न केंद्रीय मंत्रालय और विभाग भी अपनी झांकियां प्रस्तुत करेंगे, जिनमें वायु सेना मुख्यालय, नौसेना मुख्यालय, सैन्य मामलों का विभाग, संस्कृति मंत्रालय, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, आयुष मंत्रालय, गृह मंत्रालय (NDMA और NDRF), आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय (CPWD), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय प्रमुख हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में बिहार की झांकी के माध्यम से नालंदा की प्राचीन विरासत, उसके संरक्षण के प्रयास और नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना को दर्शाया गया था। झांकी में बिहार को एक बार फिर शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने का संदेश दिया गया था। इसके साथ ही भगवान बुद्ध की भव्य प्रतिमा और घोड़ा कटोरा झील को इको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करने की पहल को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया था।

अब बिहार की झांकी के इस वर्ष शामिल न होने को लेकर राज्य में एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है और लोग अगले अवसर का इंतजार कर रहे हैं।

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