शुक्रवार को सदन में UGC इक्विटी एक्ट लागू करने की मांग को लेकर जोरदार बहस छिड़ गई। माले विधायक संदीप सौरभ ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव रखा। इसी दौरान “ब्राह्मणवाद” शब्द के इस्तेमाल पर सदन में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
स्पीकर प्रेम कुमार ने तुरंत संज्ञान लेते हुए “ब्राह्मण” शब्द को कार्यवाही (प्रोसीडिंग) से हटाने का आदेश दिया। उनके इस फैसले के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच नोकझोंक बढ़ गई और सदन में हंगामा शुरू हो गया।
क्या कहा संदीप सौरभ ने?
माले विधायक ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवाद और भेदभाव को खत्म करने के लिए UGC इक्विटी एक्ट लागू करना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि “ब्राह्मणवादी मानसिकता” के लोग इसे लागू नहीं होने देना चाहते।
सरकार का जवाब
उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां मानसिकता को दर्शाती हैं। उन्होंने अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी मुजफ्फरपुर के टेक्निकल कॉलेज में पढ़े हैं और भूमिहार ब्राह्मण होने के बावजूद उन्हें रैगिंग और भेदभाव का सामना करना पड़ा था।
विजय सिन्हा ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को संवैधानिक संस्थाओं के निर्णयों पर सवाल नहीं उठाना चाहिए। सरकार हर समाज का सम्मान करती है और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के विचारों के प्रति प्रतिबद्ध है।
फिलहाल इस मुद्दे पर सदन में राजनीतिक बयानबाजी जारी है और विपक्ष सरकार पर दबाव बनाए हुए है।















