पूर्वी चंपारण के चकिया में बन रहे विराट रामायण मंदिर में दुनिया का सबसे बड़ा एकाश्म (मोनोलिथ) शिवलिंग स्थापित किया जाएगा। महाबलीपुरम की काली ग्रेनाइट चट्टान से तराशे गए इस विशाल शिवलिंग को बुधवार को विधि-विधान से पूजा के बाद बिहार के लिए रवाना कर दिया गया।
महावीर मंदिर के सुपरिटेंडेंट के. सुधाकरण और जनसंपर्क पदाधिकारी अजय कुमार सिंह महाबलीपुरम पहुंचे, जहां उन्होंने शिवलिंग की विशेष पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद इसे 96 चक्कों वाली विशेष वोल्वो हाइड्रोलिक पुलर गाड़ी में लोड किया गया। लगभग डेढ़ महीने की यात्रा के बाद यह शिवलिंग पूर्वी चंपारण के कैथवलिया पहुंचेगा।
यात्रा बेहद खास: केवल 5 किमी/घंटा की गति
शिवलिंग का कुल वजन 210 मीट्रिक टन है, जिसकी वजह से ट्रक केवल 5 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगा। खास बात यह है कि इसके मार्ग पर चकिया से कैथवलिया तक लगभग 12 किलोमीटर सड़क और पुल-पुलिया को विशेष तकनीक से नए सिरे से बनाया गया है, ताकि अतिरिक्त भार से संरचना प्रभावित न हो।
सहस्रलिंगम: 33 फीट ऊंचा और 33 फीट गोलाई
महावीर मंदिर न्यास के सदस्य सायण कुणाल के अनुसार, यह विश्व का सबसे बड़ा मोनोलिथ शिवलिंग है। इसकी प्रमुख विशेषताएं—
ऊंचाई – 33 फीट
गोलाई – 33 फीट
वजन – 210 मीट्रिक टन
1,000 छोटे शिवलिंग शामिल – सहस्रलिंगम स्वरूप
ब्लैक ग्रेनाइट चट्टान से निर्मित
15 फीट ऊंचे चांदी के अरघा पर स्थापित किया जाएगा
शिवलिंग बिहार पहुंचने पर राह में पड़ने वाले प्रमुख स्थानों पर भव्य स्वागत और पूजा-अर्चना की जाएगी। सुरक्षा के लिए एक विशेष स्क्वाड तैनात रहेगा।
विराट रामायण मंदिर: भारत की सबसे भव्य संरचनाओं में शामिल होगा
महावीर मंदिर ट्रस्ट द्वारा निर्माणाधीन यह मंदिर आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट है।
मंदिर की विशेषताएं:
लंबाई – 1080 फीट
चौड़ाई – 540 फीट
मुख्य शिखर – 270 फीट ऊंचा
अन्य शिखर – 180, 135, 108 और 90 फीट
18 शिखर और 22 मंदिरों का भव्य परिसर
गर्भगृह, नंदी स्थल, सिंह द्वार, प्रवेश द्वार, पाइलिंग कार्य पूरा
निर्माण स्थल – जानकीनगर, केसरिया और चकिया के बीच
पटना से दूरी – लगभग 120 किलोमीटर
शिलान्यास – 20 जून 2023
चार आश्रमों की अवधारणा पर बन रहा यह मंदिर आकार और संरचना दोनों में देश के सबसे विशाल धार्मिक स्थलों में से एक बनने जा रहा है।

















