गंगा नदी का कटाव एक बार फिर मुंगेर जिले के कुतलूपुर गांव के लोगों पर कहर बनकर टूटा है। पिछले तीन महीनों से जारी कटाव अब भयावह रूप ले चुका है, जिससे गांव के सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं। कई घर, बगीचे, खेत और वर्षों की कमाई देखते-देखते गंगा की धारा में समा गए।
कटाव की वजह से गांव का बड़ा हिस्सा नदी में विलीन हो चुका है। कई परिवारों को रातों-रात अपना आशियाना छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। अब ये लोग भीषण ठंड में खुले आसमान के नीचे तंबू व प्लास्टिक के सहारे रहने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा लगातार तेज धारा के साथ कटान कर रही है और हर दिन जमीन का नया हिस्सा नदी में समा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासन द्वारा कई बार मापी की गई, लेकिन अब तक ठोस बचाव कार्य नहीं दिख रहा। लोग भय और बेबसी के बीच हर रात इस डर के साथ सोते हैं कि अगली सुबह उनका बचा-खुचा घर भी मिट न जाए।
कई परिवारों की जमीन, फसलें और जीवनभर की पूंजी गंगा में विलीन हो चुकी है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर परिवार की आजीविका तक सब प्रभावित हो रहा है। राहत के नाम पर सिर्फ अस्थायी इंतज़ाम हैं, जबकि लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि गंगा का रुख पिछले कुछ वर्षों से लगातार बदल रहा है और कटाव की रफ्तार बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही सरकार और प्रशासन द्वारा ठोस तटबंध निर्माण या कटावरोधी कार्य नहीं कराया गया तो पूरा गांव नदी में समा सकता है।
इस प्राकृतिक त्रासदी के बीच कुतलूपुर गांव के लोग अपने उजड़े भविष्य को बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं—लेकिन गंगा का कटाव फिलहाल रुकने का नाम नहीं ले रहा।















