भारत में केंद्र सरकार ने श्रम सुधारों के तहत पुराने 29 लेबर कानूनों को खत्म कर चार नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं। सरकार इसे आज़ादी के बाद मजदूरों के लिए सबसे बड़ा सुधार बता रही है, जबकि देश के प्रमुख मजदूर संगठनों ने इसे “मजदूर-विरोधी” कानून करार दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि चार लेबर कोड अब पूरे देश में लागू हो गए हैं।
पीएम मोदी ने लिखा—
“आज, हमारी सरकार ने चार लेबर कोड लागू कर दिए हैं. यह आज़ादी के बाद मज़दूरों के लिए सबसे बड़े और प्रगतिशील सुधारों में से एक है. ये हमारे कामगारों को बहुत ताकतवर बनाते हैं और कम्प्लायंस को आसान करते हुए ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देंगे.”
सरकार के मुताबिक नए कोड मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षा मानकों और रोजगार की पारदर्शिता को मजबूत करेंगे। साथ ही उद्योगों पर पड़े हुए जटिल नियमों का बोझ घटेगा और रजिस्ट्रेशन-अनुपालन की प्रक्रिया आसान होगी।
ट्रेड यूनियनें बोलीं—“यह सुधार नहीं, मजदूरों के अधिकारों पर हमला”
सरकार के दावों के उलट, देशभर के लगभग सभी बड़े मजदूर संगठनों ने इन कोडों का खुलकर विरोध किया है।
INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, AICCTU, LPF, UTUC सहित कई संगठनों ने कहा है कि:
नए कोड उद्योगपतियों के दबाव में बनाए गए हैं
इससे मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे
यूनियनों की शक्ति कम होगी
कामगारों की नौकरी और सुरक्षा पहले से ज्यादा अस्थिर होगी
उन्हीं संगठनों ने 26 नवंबर को पूरे देश में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।
यूनियनों का आरोप है कि सरकार ने चार कोडों को “बड़े सुधार” के नाम पर प्रचारित किया है, जबकि इससे श्रमिकों को असल फायदा मिलने की संभावना कम है।
कांग्रेस ने कहा—‘सिर्फ पैकेजिंग बदली है, सुधार नहीं’
कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा—
“मज़दूरों से जुड़े 29 मौजूदा क़ानूनों को 4 कोड में री-पैकेज किया गया है. इसका किसी क्रांतिकारी सुधार के तौर पर प्रचार किया जा रहा है, जबकि इसके नियम अभी तक नोटिफाई भी नहीं हुए हैं.”
कांग्रेस का दावा है कि यह कदम मजदूरों के अधिकार मजबूत करने के बजाय कॉरपोरेट व उद्योगपतियों की सुविधा के लिए उठाया गया है।
चार लेबर कोडों में क्या शामिल है?
सरकार ने जिन चार कोडों को लागू किया है, वे हैं—
Code on Wages (2019) – न्यूनतम मजदूरी, समय पर वेतन
Industrial Relations Code (2020) – हायर-फायर नियम, ट्रेड यूनियन, स्ट्राइक नियम
Code on Social Security (2020) – PF, ESIC, मातृत्व लाभ, गिग-वर्कर्स
Occupational Safety, Health and Working Conditions Code (2020) – कार्यस्थल सुरक्षा, काम के घंटे, महिलाओं के लिए रात में काम की शर्तें
सरकार का कहना है कि ये कोड आधुनिक श्रम बाजार की जरूरतों के अनुसार बनाए गए हैं।
आगे क्या?
अब सभी राज्यों को इन कोडों के लिए अपने-अपने नियम अधिसूचित करने होंगे, क्योंकि श्रम कानून संयुक्त विषय है।
साथ ही यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि—
मजदूरों को वास्तविक लाभ कितनी तेजी और कितनी पारदर्शिता से मिलता है
उद्योगों द्वारा नए नियमों का कितना पालन होगा
रोजगार स्थिरता पर इन कानूनों का क्या प्रभाव पड़ेगा
विरोध प्रदर्शनों का राजनीतिक और श्रमिक-स्तर पर क्या असर होता है


















