अयोध्या/डेस्क रिपोर्ट।
अयोध्या धाम आज एक ऐतिहासिक और दिव्य अवसर का साक्षी बन रहा है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा स्थापना की पावन तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी के शुभ अभिजीत मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मंदिर प्राचीर पर भगवा धर्मध्वजा का आरोहण करेंगे। यह केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि रामराज्य के आदर्शों, मर्यादा, त्याग और भारत की सांस्कृतिक निरंतरता का तेजस्वी प्रतीक माना जा रहा है।
दस फुट ऊँचे और बीस फुट लंबे समकोण त्रिभुजाकार इस ध्वज पर सूर्य की प्रतिमा, कोविदारा वृक्ष की आकृति और ‘ॐ’ का दिव्य लेखन अंकित है, जो इसे विशेष आध्यात्मिक महत्ता प्रदान करता है।
अयोध्या में उमड़ा जनसैलाब
भोर से ही अयोध्या जय श्रीराम के जयघोष से गुंजायमान है। सरयू घाटों से लेकर गलियों, मोहल्लों और मंदिर परिसरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। संत–महात्मा और रामभक्त इस दिन को पांच सौ वर्षों के तप और संघर्ष का फल बता रहे हैं।
95 वर्षीय संत देवेंद्रानंद गिरि भावुक होकर कहते हैं, “इस जन्म में यह दृश्य देखने की आशा भी न थी; आज जीवन सार्थक हुआ।”
सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम
प्रधानमंत्री की उपस्थिति को देखते हुए संपूर्ण अयोध्या नगरी को अभेद्य सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। शहर ने छावनी का रूप धारण कर लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारियों, एडीएम, एएसपी, क्षेत्रीय अधिकारियों और निरीक्षकों की बड़ी टीम तैनात की गई है।
भीड़ नियंत्रण, विस्फोटक जांच, आपातकालीन इकाइयों, ट्रैफिक प्रबंधन और वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष बल तैनात हैं। बम डिटेक्शन स्क्वाड, डॉग स्क्वायड, एक्स–रे स्कैनर, माइंस टीम, हाई-रिस्पॉन्स वैन, ड्रोन रोधी प्रणाली और सीसीटीवी मॉड्यूल जैसी अत्याधुनिक तकनीकें सक्रिय कर दी गई हैं।
करीब 6,970 सुरक्षा कर्मियों की यह तैनाती कार्यक्रम की संवेदनशीलता और विशालता को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री का कार्यक्रम
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रातः दर्शन–पूजन, सप्तमंदिर परिक्रमा, माता अन्नपूर्णा के दर्शन और शेषावतार मंदिर में प्रणिपात करेंगे। इसके बाद मध्याह्न में धर्मध्वजा स्थापना का मुख्य कार्यक्रम संपन्न होगा।
गर्भगृह में विशेष वैदिक अनुष्ठान पिछले चार दिनों से जारी हैं, जिनमें देशभर के प्रतिष्ठित वैदिक आचार्य शामिल हैं।
नवयुग की शुरुआत का प्रतीक
अयोध्या आज उन ऐतिहासिक क्षणों का अनुभव कर रही है, जिनकी प्रतीक्षा सदियों से की जा रही थी। यह धर्मध्वजा–स्थापना, संघर्षों और तपस्या से लेकर प्राण–प्रतिष्ठा तक की यात्रा का संस्कार–समापन और नवयुगारंभ का शुभ संदेश मानी जा रही है।
पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट


















