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अयोध्या से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश: “यह भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है

अयोध्या धाम मंगलवार को एक बार फिर इतिहास रचते हुए राष्ट्रभर की आस्था और श्रद्धा का केंद्र बन गया। श्रीराम मंदिर के मुख्य शिखर पर धर्मध्वजा–आरोहण के पावन अनुष्ठान में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनरुत्थान का क्षण बताते हुए कहा—
“यह भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है।”

वीर–ध्वज और वैदिक परंपरा का उत्सव

प्रधानमंत्री सुबह अयोध्या पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उनका स्वागत किया। इसके बाद एक किलोमीटर लंबे भव्य रोड-शो में लाखों लोगों ने ‘जय श्रीराम’ के नारों और पुष्पवर्षा के साथ प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया।

धर्मध्वजा के आरोहण का मुहूर्त 11:58 से 12:30 के बीच निर्धारित था। श्रीराम मंदिर के 161 फ़ुट ऊँचे मुख्य शिखर पर चढ़ाई गई यह 22 फ़ुट लंबी और 11 फ़ुट चौड़ी ध्वजा रामराज्य के आदर्शों और सनातन संस्कृति की तेजोमय परंपरा का प्रतीक मानी जाती है।

“अयोध्या अपनी प्राचीन तेजस्विता लौटा रही है”

धर्मध्वज आरोहण के बाद सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की हजारों वर्ष पुरानी वैदिक परंपरा का पुनर्जागरण है।

उन्होंने कहा—
“अयोध्या आज पुनः अपनी प्राचीन तेजस्विता, वैदिक परंपरा और आध्यात्मिक सामर्थ्य को प्रकाशित कर रही है। यह धर्मध्वज सनातन चेतना के पुनर्प्रकाश का प्रतीक है।”

प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान पूरे परिसर में ‘श्रीराम’ के जयघोष गूंजते रहे। कार्यक्रम में देश के सुप्रसिद्ध कलाकारों ने मंगल स्तोत्र, रामचरितमानस के प्रसंग और संत-समुदायों द्वारा रचित मंगल-गान प्रस्तुत किया।

22 महीनों बाद पुनः रामलला के दरबार में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मोदी लगभग 22 महीनों बाद रामलला के समक्ष पुनः उपस्थित हुए।
5 अगस्त 2020 को उन्होंने मंदिर निर्माण की शिला रखी थी और 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई थी—जिसे भारत की आस्था के इतिहास में सबसे बड़ा अध्याय माना गया।

अयोध्या: एक पौराणिक, सांस्कृतिक और वैदिक धरोहर

अयोध्या का इतिहास 7,000 वर्षों से भी अधिक पुराना माना जाता है। सरयू तट पर बसाई गई यह पवित्र नगरी सूर्यवंशी वैवस्वत मनु की कृति थी। स्कंद पुराण में इसे ‘ईश्वर-निकेतन’ और सप्तपुरियों में से एक मोक्षदायिनी नगरी बताया गया है।

इसी वैदिक परंपरा की निरंतरता को प्रधानमंत्री ने आज के अनुष्ठान से जोड़ते हुए कहा कि भारत एक बार फिर धर्म, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर विश्व को नेतृत्व देने की क्षमता के साथ खड़ा है।

शिखर श्रृंखला और मंदिर की भव्यता

श्रीराम मंदिर का स्थापत्य, जिसमें पाँच उप-शिखर और परिसर में स्थित छह उप-मंदिर शामिल हैं, इसे देवलोक-सदृश भव्यता प्रदान करता है। पूरा परिसर दिव्यता, वास्तुशास्त्र और सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत संगम दिखाई देता है।

दिनभर के अनुष्ठानों का समापन

धर्मध्वजा–आरोहण के बाद प्रधानमंत्री ने जनता को संबोधित किया।
सायंकाल पूर्णाहुति के साथ दिनभर चले वैदिक उत्सव का समापन किया जाएगा, जिसमें देशभर के संत-समुदाय शामिल रहेंगे।

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