बिहार विधानसभा का माहौल आज उस समय गर्म हो गया जब राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने सरकार के बुलडोज़र एक्शन और सामाजिक व्यवस्थाओं को निशाने पर लिया।
सर्वजीत ने कहा कि यह कार्रवाई विकास नहीं बल्कि गरीबों पर ज़ुल्म का नया अध्याय है। उनके मुताबिक़, प्रशासन की सख़्ती का असर सबसे ज़्यादा उन बेबस लोगों पर पड़ रहा है जिनकी आवाज़ अक्सर सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुँचती।
गया अस्पताल पर विवादित टिप्पणी
सदन में असली तूफ़ान तब उठ खड़ा हुआ जब सर्वजीत ने गया के सरकारी अस्पताल की हालत का हवाला देते हुए कहा—
“अस्पताल की सूरत देखकर ऐसा लगता है जैसे दलितों के मोहल्ले में आ गए हों।”
इस टिप्पणी से सत्ता पक्ष के विधायक नाराज़ हो गए और इसे अपमानजनक, भेदभावपूर्ण और गैर-जिम्मेदार बताया।
स्पीकर का हस्तक्षेप और सदन में शांति
सदन में शोर-शराबा बढ़ने पर स्पीकर प्रेम कुमार ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान घायल हुई विधायक दीपा मांझी को देखने के लिए वे खुद अस्पताल गए थे और अस्पताल की स्थिति पहले से काफी सुधरी है।
स्पीकर ने सर्वजीत को सलाह दी कि वे एक बार फिर अस्पताल जाकर अपनी आंखों से हालात देखें और उसके बाद सदन को सटीक जानकारी पेश करें।
साथ ही उन्होंने सदस्यों से अपील की कि बहस में भाषा की मर्यादा और सामाजिक संवेदनशीलता का ख़ास ध्यान रखा जाए, क्योंकि सदन की हर बात राज्य के करोड़ों लोगों तक पहुँचती है।
राजनीतिक विश्लेषण
विश्लेषकों का कहना है कि इस बहस ने साफ़ कर दिया कि बिहार विधानसभा में विपक्ष अब हर मुद्दे पर सरकार की कार्रवाई पर मुखर होने लगा है। वहीं सत्ता पक्ष भी किसी भी भेदभावपूर्ण बयान को तुरंत खारिज करने और सकारात्मक संदेश देने के लिए सजग है।
पटना से राहुल कुमार की रिपोर्ट















