पटना।
प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी को सख्ती से लागू करने के सरकारी दावों के बीच राजधानी पटना से गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। डीएम और एसएसपी की संयुक्त समीक्षा बैठक में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि 1 अप्रैल 2016 से 14 दिसंबर 2025 तक जिले में जब्त की गई दो लाख चार हजार 324.058 लीटर शराब अब तक नष्ट नहीं की गई है। इसे प्रशासन ने बड़ी चूक मानते हुए संबंधित विभागों को कड़ी फटकार लगाई है।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, उत्पाद विभाग, पुलिस और रेल पुलिस (जीआरपी) द्वारा इस अवधि में कुल 31,29,925.329 लीटर शराब जब्त की गई थी। इनमें से 29,25,601.271 लीटर शराब का ही विनष्टीकरण हो सका है, जबकि शेष बड़ी मात्रा अब भी थानों और गोदामों में पड़ी हुई है।
शराब नष्ट करने में सबसे पीछे पुलिस विभाग
रिपोर्ट के मुताबिक शराब विनष्टीकरण में सबसे ज्यादा लापरवाही पुलिस विभाग की ओर से सामने आई है। जिले के विभिन्न थानों में अभी भी 1,69,134 लीटर से अधिक शराब रखी हुई है, जिसे अब तक नष्ट नहीं किया गया। वहीं, उत्पाद विभाग के थानों में 32,439 लीटर शराब लंबित है, जबकि रेल पुलिस के पास भी करीब 2,750 लीटर शराब विनष्टीकरण की प्रतीक्षा में है।
प्रस्ताव और आदेश के बाद भी देरी
हैरान करने वाली बात यह भी सामने आई कि उत्पाद विभाग ने अब तक 10,090 लीटर अवैध शराब को नष्ट करने का प्रस्ताव ही डीएम कार्यालय को नहीं भेजा है। वहीं, 2,100.580 लीटर शराब ऐसी है, जिसके विनष्टीकरण का आदेश जारी हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद उसे नष्ट नहीं किया गया।
आंकड़ों के अनुसार, विनष्टीकरण आदेश मिलने के बाद भी शराब नष्ट नहीं किए जाने का सबसे बड़ा मामला उत्पाद थाना पटना सदर से जुड़ा है, जहां 1,936.500 लीटर शराब लंबित है। इसके बाद उत्पाद थाना दानापुर में 164.080 लीटर शराब इस श्रेणी में है।
पटना सदर सबसे आगे, कई थानों की भूमिका सवालों के घेरे में
शराब नष्ट करने का प्रस्ताव नहीं भेजने वाले थानों में भी उत्पाद थाना पटना सदर सबसे आगे है, जहां 7,926.890 लीटर शराब के लिए अब तक प्रस्ताव नहीं भेजा गया। इसके अलावा उत्पाद थाना दानापुर (1,228.490 लीटर), पालीगंज (160 लीटर), बाढ़ (493.115 लीटर) और मसौढ़ी (282 लीटर) भी सूची में शामिल हैं।
डीएम-एसएसपी ने दिए सख्त निर्देश
डीएम और एसएसपी ने इस स्थिति को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही करार देते हुए संबंधित पदाधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि नियमित छापेमारी, गिरफ्तारी और जब्ती के साथ-साथ शराब के विनष्टीकरण में भी किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी और फील्ड स्तर पर हो रही देरी को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सभी एसडीओ और एसडीपीओ को निर्देश दिया गया है कि थानावार दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी की तैनाती कर शराब विनष्टीकरण की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी कराई जाए। साथ ही, वाहनों के अधिहरण, लंबित मामलों के निष्पादन और शराब विनष्टीकरण की नियमित समीक्षा भी की जाएगी।
विभागवार जब्ती और विनष्टीकरण (2016-2025)
- पुलिस विभाग:
- जब्त: 24,11,993.755 लीटर
- नष्ट: 22,42,859.686 लीटर
- शेष: 1,69,134.069 लीटर
- उत्पाद विभाग:
- जब्त: 6,23,077.002 लीटर
- नष्ट: 5,90,637.931 लीटर
- शेष: 32,439.071 लीटर
- रेल पुलिस (जीआरपी):
- जब्त: 94,854.572 लीटर
- नष्ट: 92,103.654 लीटर
- शेष: 2,750.918 लीटर
प्रशासन का कहना है कि यदि शराबबंदी को प्रभावी बनाना है, तो जब्ती के साथ-साथ समयबद्ध विनष्टीकरण भी उतना ही जरूरी है। लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

















