रोहतास जिले के शिवसागर थाना क्षेत्र स्थित जिगना गांव इन दिनों अंधेरे की कैद में जीने को मजबूर है। वजह है विद्युत बोर्ड के एक कनिष्ठ अभियंता के साथ हुई मारपीट, जिसकी सज़ा मानो पूरे गांव को दे दी गई हो। शनिवार की अलसुबह से ही पूरे गांव की बिजली आपूर्ति काट दी गई, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
बिजली गुल होते ही सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना भी ठप पड़ गई है। गांव के नल सूखे पड़े हैं और लोग पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है। बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं का रसोई काम और सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। मोबाइल चार्ज करना तक ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि गांव के एक व्यक्ति के अपराध की सज़ा पूरे गांव को देना तानाशाही फरमान जैसा है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सिंह ने बताया कि गांव के अधिकांश घरों में वैध बिजली कनेक्शन हैं और जिस व्यक्ति के साथ मारपीट हुई है, उसके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कर ली गई है। इसके बावजूद पूरे गांव की बिजली काट देना न केवल अविवेकपूर्ण है, बल्कि सरकारी दिशा-निर्देशों के भी खिलाफ़ है।
वहीं, दूसरी ओर विद्युत बोर्ड का पक्ष भी कम गंभीर नहीं है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, कुछ असामाजिक तत्वों ने औचक निरीक्षण के दौरान कनीय अभियंता और अन्य विद्युत कर्मियों पर जानलेवा हमला किया। कनीय अभियंता विजय शंकर के सिर और आंख में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि जितेंद्र समेत दो लाइनमैन भी घायल हुए हैं। यह घटना एक आटा चक्की मिल के निरीक्षण के दौरान हुई। सभी घायलों का इलाज सासाराम सदर अस्पताल में चल रहा है और फिलहाल वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
प्रशासन ने पूरे गांव की बिजली काटे जाने की कार्रवाई को ग़लत ठहराया है। अनुमंडलीय पदाधिकारी डॉ. नेहा कुमारी ने स्पष्ट कहा है कि मारपीट के मामले में प्राथमिकी दर्ज है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। यदि पूरे गांव की बिजली आपूर्ति बंद की गई है, तो उसे जल्द बहाल कराया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन अपराध और व्यवस्था के बीच संतुलन बना पाएगा, या फिर जिगना गांव यूं ही अंधेरे में इंसाफ़ का इंतज़ार करता रहेगा?

















