बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। बीते 20 दिनों में 7 हिंदुओं की मौत की खबरों ने न सिर्फ देश की कानून-व्यवस्था, बल्कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
ताज़ा और दिल दहला देने वाली घटना नवगांव जिले के महादेबपुरा इलाके से सामने आई है। यहां 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार को एक उन्मादी भीड़ ने घेर लिया। जान बचाने के लिए मिथुन भागा, लेकिन हमलावरों से बचने की कोशिश में वह नहर में कूद गया। तेज बहाव में डूबने से उसकी मौत हो गई।
मृतक की बहन बैसाखी सरकार का कहना है कि मिथुन परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। आरोप है कि भीड़ ने उस पर चोरी का झूठा आरोप लगाकर हमला किया। बैसाखी सवाल उठाती हैं—
“अगर मेरा भाई अपराधी था, तो उसके खिलाफ पहले कभी कोई मामला क्यों दर्ज नहीं हुआ?”
यह सवाल अब सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे अल्पसंख्यक समाज की आवाज़ बन चुका है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हालिया घटनाओं में एक ही पैटर्न बार-बार सामने आ रहा है। चटगांव विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कुशल चक्रवर्ती बताते हैं कि कट्टरपंथी तत्व पहले हिंदू विरोधी भाषणों और नफरती व्हाट्सएप संदेशों के जरिए माहौल को ज़हरीला बनाते हैं। इसके बाद किसी हिंदू को ईशनिंदा या किसी आपराधिक मामले में झूठा फंसा दिया जाता है। पहले से उकसाई गई भीड़ फिर जानलेवा हमला कर देती है।
मेमनसिंह और अन्य इलाकों में हुई घटनाएं भी इसी सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करती हैं।
हिंदू-बौद्ध-ईसाई काउंसिल के महासचिव मोहिंदर कुमार का आरोप है कि कट्टरपंथियों के खिलाफ न तो सख्ती से मामले दर्ज किए जाते हैं और न ही समय पर गिरफ्तारियां होती हैं। कानून की यही ढील हिंसा करने वालों को खुली छूट दे रही है।
इस हिंसा का असर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखने लगा है। वॉशिंगटन से आई जानकारी के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए B1/B2 टूरिस्ट वीज़ा पर लगभग पौने तीन लाख रुपये का वीज़ा बॉन्ड अनिवार्य करने की घोषणा की है। यह फैसला नेपाल, भूटान सहित कुल 31 देशों पर लागू होगा।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, कानून का इकबाल और अंतरराष्ट्रीय भरोसा—तीनों कठघरे में हैं। सवाल यह है कि क्या सत्ता और सिस्टम इस हिंसक अराजकता पर लगाम लगाएंगे, या फिर खामोशी ही सबसे बड़ा जवाब बनी रहेगी?


















