बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जहां कई जिलों में मतदान प्रतिशत को लेकर सवाल उठे, वहीं पूर्णिया ने चुनावी प्रबंधन और लोकतांत्रिक भागीदारी की एक नई इबारत लिख दी। चुनावी सियासत, प्रशासनिक रणनीति और मतदाता जागरूकता के बेहतरीन तालमेल का नतीजा यह रहा कि पूर्णिया जिला राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल बन गया।
इसी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए पूर्णिया के जिला अधिकारी अंशुल कुमार को 25 जनवरी, राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर ‘बेस्ट इलेक्शन डिस्ट्रिक्ट’ के खिताब से सम्मानित किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित सम्मान भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राष्ट्रपति की मौजूदगी में प्रदान किया जाएगा। पूर्णिया को यह पुरस्कार इलेक्शन मैनेजमेंट एंड लॉजिस्टिक्स श्रेणी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जा रहा है।
आंकड़े खुद इस सफलता की कहानी बयां करते हैं। पूर्णिया जिले में कुल 76.61 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो बिहार के 38 जिलों में तीसरे स्थान पर रहा। वहीं कस्बा विधानसभा क्षेत्र ने पूरे राज्य में रिकॉर्ड कायम करते हुए 81.97 प्रतिशत मतदान दर्ज किया, जो बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों में सर्वाधिक रहा।
जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार यह उपलब्धि जिला अधिकारी अंशुल कुमार के कुशल नेतृत्व और पूरी प्रशासनिक टीम की सामूहिक मेहनत का परिणाम है। बूथ मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा व्यवस्था, मतदाता सुविधाओं और जागरूकता अभियानों पर विशेष रणनीति के तहत काम किया गया। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि मतदाताओं को भय नहीं, बल्कि भरोसे और सुविधा का माहौल मिले।
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि ‘पूर्णिया मॉडल’ आने वाले चुनावों के लिए एक प्रभावी ब्लूप्रिंट बन सकता है। जहां अक्सर कम मतदान को लेकर सवाल खड़े होते हैं, वहीं पूर्णिया ने यह साबित कर दिया कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो लोकतंत्र की जड़ें और गहरी की जा सकती हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला यह सम्मान केवल एक अधिकारी का नहीं, बल्कि पूरे पूर्णिया जिले और उसकी लोकतांत्रिक चेतना का सम्मान है। यह उपलब्धि बताती है कि जब सिस्टम ईमानदारी से काम करता है, तो जनता भी पूरे जोश के साथ लोकतंत्र के इस महापर्व में भागीदारी निभाती है।















