पटना।
बिहार में कानून-व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को और ज्यादा मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। बिहार पुलिस की 112 इमरजेंसी सेवा को प्रभावी बनाए रखने के लिए सेना से सेवानिवृत्त चालकों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ उनकी सेवा अवधि को भी एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि अब बिहार पुलिस में कार्यरत सेवानिवृत्त सैन्य चालकों को 25 हजार रुपये की जगह 30 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इसके साथ ही उनकी सेवा अवधि को मार्च 2026 से आगे बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2026-27 तक कर दिया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि ये सेवानिवृत्त चालक AWPO दानापुर के माध्यम से नियुक्त किए गए हैं और वर्तमान में पुलिस की 112 आपातकालीन सेवा सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में तैनात हैं। सरकार के इस फैसले से न सिर्फ पुलिस की इमरजेंसी रिस्पांस क्षमता मजबूत होगी, बल्कि उन अनुभवी चालकों को भी राहत मिलेगी, जो मुश्किल हालात में पुलिस तंत्र की रीढ़ बने हुए हैं।
सरकार पर 161 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च
इस सेवा विस्तार और मानदेय वृद्धि पर राज्य सरकार को कुल 161 करोड़ 11 लाख 84 हजार रुपये का अनुमानित व्यय आएगा। इसके अलावा अब चालकों को मासिक 30 हजार रुपये मानदेय के साथ-साथ 4 हजार रुपये वार्षिक वर्दी भत्ता भी दिया जाएगा।

भर्ती प्रक्रिया जारी, इसलिए सेवा विस्तार जरूरी
सम्राट चौधरी ने बताया कि इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम परियोजना के तहत कुल 4426 चालक पद स्वीकृत हैं। इनमें 3418 चालक सिपाही और 1008/1009 चालक हवलदार के पद शामिल हैं। इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया फिलहाल जारी है, लेकिन भर्ती और प्रशिक्षण में समय लगना तय है। ऐसे में 112 सेवा और अन्य पुलिस कार्यों को सुचारू बनाए रखने के लिए सेवानिवृत्त चालकों का सेवा विस्तार आवश्यक हो गया था।
पुलिस ढांचे को लगातार मजबूत कर रही सरकार
उपमुख्यमंत्री ने राजनीतिक लहजे में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बिहार पुलिस को आधुनिक, सशक्त और भरोसेमंद बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। हाल के दिनों में
- पूर्वी चंपारण में एसपी कार्यालय,
- रोहतास के डिहरी पुलिस केंद्र में रक्षित कार्यालय और शस्त्रागार,
- लखीसराय में महिला पुलिसकर्मियों के लिए 200 बेड का आधुनिक बैरक
को मंजूरी दी गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार का साफ संदेश है कि जनता की सुरक्षा और आपातकालीन मदद में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यही कारण है कि पुलिस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए ठोस और दूरगामी फैसले लिए जा रहे हैं।


















