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अमृत सरोवर बनने से पहले ही लूट का सरोवर! मॉडल पंचायत में सरकारी ज़मीनों पर भू-माफ़ियाओं का कब्ज़ा

मुजफ्फरपुर।
जिस पोखर पर केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अमृत सरोवर के तहत निर्माण होना था, वह तालाब काग़ज़ों में तो आज भी ज़िंदा है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में कब का बिक चुका है। मामला सिर्फ एक पोखर तक सीमित नहीं है—पंचायत की सड़कें, स्कूल की ज़मीन और अन्य सरकारी भूमि भी या तो अवैध कब्ज़े में है या फिर खुलेआम सौदेबाज़ी की भेंट चढ़ चुकी है।

यह चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड स्थित विशनपुर बहनगरी पंचायत से। काग़ज़ों में यह पंचायत एक मॉडल पंचायत है, लेकिन ज़मीन पर विकास नहीं, बल्कि साज़िश, लूट और भू-माफ़ियाओं की खुली गुंडागर्दी का बोलबाला दिख रहा है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसी पंचायत की मुखिया बबीता कुमारी को राष्ट्रपति तक सम्मानित कर चुके हैं। बावजूद इसके, आज हाल यह है कि पंचायत के पास विकास कार्यों के लिए एक इंच भी सरकारी ज़मीन उपलब्ध नहीं बची। न स्कूल बन पा रहा है, न सड़क, न तालाब—हर योजना भू-माफ़ियाओं की हवस में दम तोड़ रही है।

मुखिया बबीता कुमारी का आरोप है कि पंचायत में सैकड़ों एकड़ सरकारी भूमि काग़ज़ों में दर्ज है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उस पर भू-माफ़ियाओं का कब्ज़ा है। उन्होंने कई बार सकरा अंचलाधिकारी को लिखित रूप में अवैध कब्ज़े और सरकारी ज़मीन की बिक्री की जानकारी दी, लेकिन हर बार फाइलें दबी रहीं और कार्रवाई शून्य रही। नतीजतन, माफ़ियाओं के हौसले बुलंद होते चले गए और पंचायत का विकास पूरी तरह ठप पड़ गया।

स्थानीय समाजसेवी बबलू कुमार ने भी अंचल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके मुताबिक, पंचायत में स्कूल की ज़मीन, पोखर, सड़क—कोई भी सरकारी संपत्ति सुरक्षित नहीं है। या तो कब्ज़ा हो चुका है या फिर खुलेआम बेच दी गई है। आरोप है कि प्रशासनिक चुप्पी ने भू-माफ़ियाओं को मानो खुला लाइसेंस दे दिया।

जब मामला ज़िला मुख्यालय तक पहुंचा, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए पूर्वी अनुमंडल पदाधिकारी को जांच का आदेश दिया है। डीएम ने साफ कहा है कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे—चाहे वे सरकारी कर्मी हों या भू-माफ़िया—उन पर विधि सम्मत सख़्त कार्रवाई की जाएगी।

अब बड़ा सवाल यही है कि
क्या यह जांच भी सिर्फ़ काग़ज़ों तक सिमट कर रह जाएगी?
या वाकई उस तंत्र पर चोट होगी, जिसने अमृत सरोवर बनने से पहले ही सरकारी ज़मीन को लूट का सरोवर बना दिया?

विशनपुर बहनगरी पंचायत की निगाहें अब प्रशासन पर टिकी हैं—इंसाफ़ होगा या एक बार फिर माफ़िया बच निकलेंगे?

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