“शादी करो या तलाक दो, दोनों ही हालात में औरत ही अपना घर खोती है, मर्द कभी बेघर नहीं होता”—यह जुमला अब किसी भावुक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उस सामाजिक और सियासी हकीकत का आईना बन चुका है, जहां ताक़तवर मर्द औरत के दर्द को हाशिये पर धकेल देता है।

भोजपुरी स्टार और कभी सियासी दांव-पेंच का चेहरा बने पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह की यह टिप्पणी एक व्यक्तिगत पीड़ा से आगे बढ़कर समाज और राजनीति दोनों पर तीखा सवाल बनकर सामने आई है।
ज्योति सिंह ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में एक भावनात्मक लेकिन सीधा संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा—
“अपनी बेटी की शादी उस शख्स से करना, जिसमें फैसले लेने की काबिलियत हो, वरना अक्सर मां के लाडले बेटे घर नहीं बसा पाते और इल्जाम लड़की पर लगाते हैं।”

यह महज़ इशारा नहीं था, बल्कि सीधे लफ्ज़ों में कही गई वह बात थी, जो पितृसत्तात्मक सोच की जड़ों पर चोट करती है। ज्योति का कहना साफ है—जब मर्द फैसले लेने से बचता है, तो अपनी नाकामी का बोझ औरत पर डाल देता है।
यह बयान उस सामाजिक ढांचे की याद दिलाता है, जहां औरत से कुर्बानी की उम्मीद की जाती है, लेकिन मर्द की जवाबदेही शायद ही कभी तय होती है।
पवन सिंह की निजी ज़िंदगी पहले भी विवादों के घेरे में रही है।
2014 में पहली पत्नी नीलम सिंह की शादी के एक साल बाद आत्महत्या, फिर 2018 में ज्योति सिंह से दूसरी शादी, और कुछ ही महीनों में रिश्तों में दरार—यह सिलसिला सवालों से भरा रहा है।
ज्योति सिंह ने पवन सिंह पर अबॉर्शन कराने का दबाव, मानसिक उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। ये आरोप सिर्फ घरेलू विवाद नहीं, बल्कि कानून और नैतिकता दोनों के दायरे में आने वाले गंभीर मामले हैं। तलाक का केस आज भी अदालत में लंबित है और इसका फैसला सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक सबकी निगाहों में है।
दिलचस्प मोड़ तब आया जब 2024 के चुनाव में पवन सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे। उस वक्त ज्योति सिंह ने उनके लिए प्रचार किया। सुलह की बातें हुईं, रिश्तों में सुधार के संकेत दिए गए, लेकिन चुनावी नतीजों के बाद फिर अलगाव की खबरें तैरने लगीं।
सवाल उठता है—
क्या रिश्तों की सुलह भी सियासी ज़रूरतों के हिसाब से तय होती है?

अब हालिया घटनाक्रम में “मिस्ट्री गर्ल” महिमा सिंह के साथ वायरल वीडियो, पार्टी में “तुम मेरी जान हो” जैसे जुमले और तीसरी शादी की चर्चाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच ज्योति सिंह की पोस्ट सामने आती है, जिसमें सीता के वनवास और शिव के ठुकराए जाने जैसी उपमाएं हैं।
यह कहानी सिर्फ एक भोजपुरी स्टार की निजी ज़िंदगी की नहीं है, बल्कि उस समाज की तस्वीर है, जहां शोहरत, ताक़त और सियासत मिलकर औरत को बार-बार वनवास भेज देती है—और सवाल पूछने पर भी वही कटघरे में खड़ी कर दी जाती है।

















