बिहार के डेंटल छात्रों को बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल डेंटल कॉलेजों में डोमिसाइल (स्थानीय निवास) नीति लागू नहीं की जाएगी।
पटना हाई कोर्ट में मामला लंबित, इसलिए फैसला टला
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने शुक्रवार को सदन में कहा कि डेंटल कॉलेजों में डोमिसाइल नीति लागू नहीं होगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मामला पटना हाई कोर्ट में लंबित है, इसलिए सरकार इस पर अभी कोई निर्णय नहीं ले सकती।
मंत्री के इस बयान के बाद डेंटल अभ्यर्थियों में निराशा देखी जा रही है।
छात्रों की मांग क्या थी?
दंत चिकित्सक भर्ती में 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण नीति में बदलाव के बाद कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि वे अपने ही राज्य में अवसर से वंचित हो रहे हैं। छात्रों का कहना है कि बाहर के राज्यों के अभ्यर्थियों को भी समान अवसर मिलने से बिहार के छात्रों की सीटें कम हो रही हैं।
इसी को लेकर छात्रों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से 100 प्रतिशत डोमिसाइल आधारित आरक्षण लागू करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि राज्य के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्राथमिकता बिहार के छात्रों को मिलनी चाहिए।
सरकार का रुख साफ
सदन में सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल डोमिसाइल नीति लागू नहीं होगी। कोर्ट में मामला लंबित रहने तक किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है।
इस फैसले को डेंटल छात्रों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि सरकार उनके पक्ष में निर्णय लेगी। अब सभी की नजर हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जिसके बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।















