नई दिल्ली: जहर के संगीन कारोबार का पर्दाफाश करते हुए Delhi Police की क्राइम ब्रांच ने नकली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। छापेमारी के दौरान करीब 5 करोड़ रुपये कीमत का ट्रामाडोल बरामद हुआ है, जिसका इस्तेमाल नशे के आदी लोग हेरोइन के विकल्प के तौर पर कर रहे थे।

जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह फर्जी मेडिकल स्टोर्स और जाली चिकित्सा केंद्रों की आड़ में मौत का सौदा कर रहा था। इस रैकेट का मास्टरमाइंड अरुण कुमार, मूल रूप से Gaya का निवासी है, जिसने मोटा मुनाफा कमाने की लालच में अवैध फैक्ट्री खड़ी कर रखी थी।
कैसे चलता था पूरा नेटवर्क?
पुलिस के मुताबिक, तस्करी कर लाए गए ट्रामाडोल पाउडर से गोलियां तैयार की जाती थीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस कच्चे माल की कीमत पांच करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है। प्रोसेसिंग के बाद इन्हें ऊंचे दामों पर दिल्ली, गया समेत कई शहरों में सप्लाई किया जाता था।
सहायक औषधि नियंत्रक विजय कुमार के अनुसार, “स्टेट लाइव साइंस प्राइवेट लिमिटेड” नामक फैक्ट्री ममता कुमारी के नाम पंजीकृत थी, लेकिन असल संचालन उनके पति अरुण कुमार के हाथ में था। लाइसेंस केवल 10 तरह की टैबलेट के परीक्षण उत्पादन के लिए था, मगर उसी आड़ में बड़े पैमाने पर जाली दवाओं का निर्माण किया जा रहा था।
ट्रामाडोल क्यों है खतरनाक?
Tramadol एक ओपिओइड दर्दनाशक दवा है, जिसका दुरुपयोग गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके दुष्प्रभाव बेहद खतरनाक हो सकते हैं—

- सांस की रफ्तार धीमी होकर दम घुटने का खतरा
- याददाश्त और मानसिक संतुलन पर असर
- लिवर और किडनी फेल होने की आशंका
- दिल की धड़कन अनियंत्रित, हार्ट अटैक का खतरा
- कम समय में गंभीर लत लगना
कई राज्यों में छापेमारी, 9 गिरफ्तार
विश्वसनीय खुफिया इनपुट के आधार पर विभिन्न राज्यों में समन्वित छापेमारी की गई। दो फर्जी फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ हुआ और नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सप्लायर्स और अवैध मेडिकल स्टोर्स की तलाश में जुटी है।
यह कार्रवाई न केवल अवैध दवा कारोबार पर बड़ा प्रहार है, बल्कि युवाओं को नशे के जाल से बचाने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।














