15 फरवरी यानी आज देशभर में महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस दिन भगवान Shiva की विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है।
मान्यता है कि इसी पावन रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था। इसलिए भक्त पूरे दिन व्रत रखकर रात्रि में चार प्रहर की पूजा करते हैं।
चार प्रहर का पूजन मुहूर्त
महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहर में पूजा का विधान है।
🔹 पहला प्रहर पूजन:
आज शाम से रात्रि तक (लगभग सूर्यास्त के बाद आरंभ)
🔹 दूसरा प्रहर पूजन:
आज रात 9 बजकर 23 मिनट से 16 फरवरी को अर्धरात्रि 12 बजकर 35 मिनट तक
🔹 तीसरा प्रहर पूजन:
16 फरवरी की रात 12:35 मिनट से प्रातः लगभग 3:47 मिनट तक
🔹 चौथा प्रहर पूजन:
प्रातः 3:47 मिनट से सूर्योदय तक
(समय स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है।)
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए कई शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं। भक्त दिनभर किसी भी समय श्रद्धा से जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक कर सकते हैं।
विशेष रूप से निशिता काल (अर्धरात्रि) में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
पूजा विधि संक्षेप में
- प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें
- शिवलिंग पर जल व दूध से अभिषेक करें
- बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल अर्पित करें
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें
- रात्रि में चारों प्रहर की पूजा करें
महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।















