बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जनगणना को लेकर प्रशासनिक तैयारी शुरू हो गई है। जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनरों की नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और मार्च तक सभी कर्मियों का प्रशिक्षण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद 17 अप्रैल से नागरिक स्वयं पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
जनगणना निदेशालय के निर्देश पर अपर समाहर्ता सह जिला जनगणना अधिकारी ने वरीय उप समाहर्ता को शीघ्र मास्टर ट्रेनर नामित करने का निर्देश दिया है। मुजफ्फरपुर में दो मास्टर ट्रेनरों की तैनाती की जाएगी, जो आगे जनगणना कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। मार्च तक प्रशिक्षण सत्र पूरा कर लेने के बाद अप्रैल से स्वगणना का कार्य शुरू किया जाएगा।
17 अप्रैल से शुरू होगी स्वगणना
इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटाइज्ड होगी। नागरिकों की सुविधा के लिए एक विशेष स्वगणना पोर्टल विकसित किया गया है, जिस पर 17 अप्रैल से 1 मई तक लोग स्वयं अपनी जानकारी भर सकेंगे। पोर्टल दोनों चरणों के लिए उपलब्ध रहेगा। इसके संचालन और उपयोग को लेकर जल्द ही व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाएगा।
2 से 31 मई तक मकान सूचीकरण
स्वगणना के बाद 2 से 31 मई तक प्रथम चरण के तहत मकान सूचीकरण का कार्य जनगणना कर्मियों द्वारा किया जाएगा। इस दौरान नागरिकों द्वारा भरी गई जानकारी का सत्यापन भी होगा। सभी विवरण मोबाइल एप के माध्यम से डिजिटल रूप में दर्ज किए जाएंगे।
मकान सूचीकरण के दौरान करीब 33 सवाल गृहस्वामी से पूछे जाएंगे। इनमें मकान की संरचना, पीने का पानी, बिजली, शौचालय, इंटरनेट सुविधा, गैस कनेक्शन, वाहनों की संख्या और मुख्य अनाज के उपभोग जैसे विवरण शामिल होंगे। इसके अलावा रेडियो, टीवी, लैपटॉप, कंप्यूटर और अपशिष्ट जल निकासी से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे।
फरवरी 2027 से दूसरा चरण
यह पूरी जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। फरवरी 2027 से दूसरे चरण की शुरुआत होगी, जिसमें जनसंख्या की गणना की जाएगी।
स्मार्टफोन नहीं होने पर भी मिलेगी सुविधा
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन घरों में स्मार्टफोन या इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, वहां जनगणना कर्मी स्वयं घर-घर जाकर पोर्टल के माध्यम से जानकारी दर्ज करेंगे। साथ ही वे लोगों को स्वगणना प्रक्रिया के बारे में जागरूक भी करेंगे।
डिजिटल माध्यम से होने वाली इस जनगणना को प्रशासन पारदर्शी और सटीक आंकड़ों के लिए अहम कदम मान रहा है। इससे न सिर्फ डेटा संग्रहण आसान होगा, बल्कि भविष्य की योजनाओं के निर्माण में भी मदद मिलेगी।

















