बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में एक बार फिर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) के दौरान बायोमेट्रिक और दस्तावेजों की जांच में गड़बड़ी मिलने पर चार अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया।
जानकारी के अनुसार सोमवार को आयोजित पीईटी में सभी उम्मीदवार लिखित परीक्षा पास करने के बाद शारीरिक जांच के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान अधिकारियों ने फिंगरप्रिंट और फोटो मिलान की प्रक्रिया में अंतर पाया। जब बायोमेट्रिक डेटा की तुलना लिखित परीक्षा के समय दर्ज रिकॉर्ड से की गई तो दोनों में स्पष्ट असमानता सामने आई।
डमी कैंडिडेट से दिलाई गई थी लिखित परीक्षा
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा में अपनी जगह डमी कैंडिडेट को बैठाकर परीक्षा दिलाई थी और अच्छे अंक हासिल किए थे। पीईटी स्थल पर पहचान सत्यापन के दौरान अधिकारियों को संदेह हुआ।
गहन पूछताछ में चारों के जवाबों में विरोधाभास मिला, जिसके बाद फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चारों को हिरासत में लेकर मामला दर्ज कर लिया। गिरफ्तार अभ्यर्थियों में गया, छपरा, नालंदा और पटना के निवासी शामिल हैं।
संगठित गिरोह की आशंका
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा खेल किसी संगठित गिरोह के जरिए कराया गया हो सकता है। ऐसे गिरोह मोटी रकम लेकर असली अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा में बैठाते हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।
हर चरण में कड़ी निगरानी
अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए इस बार हर चरण में बायोमेट्रिक सत्यापन, फोटो मिलान और दस्तावेजों की सख्त जांच की जा रही है। इसके बावजूद कुछ लोग नए-नए तरीकों से धोखाधड़ी करने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।















