राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। चारा घोटाला मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। सीबीआई की ओर से दायर जमानत रद्द करने की याचिका पर कोर्ट सुनवाई करेगा।
सीबीआई के बाद झारखंड सरकार ने भी लालू यादव की जमानत रद्द करने की मांग की है। गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें विभिन्न मामलों में जमानत दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यदि फैसला उनके खिलाफ जाता है तो उन्हें दोबारा जेल जाना पड़ सकता है।

बीते दिन लैंड फॉर जॉब मामले में भी लालू यादव राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए थे, जहां उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया।
क्या है चारा घोटाला?
चारा घोटाला बिहार के इतिहास के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में गिना जाता है। इसमें सरकारी खजाने से लगभग ₹950 करोड़ की अवैध निकासी की गई थी। यह मामला 1990 के दशक में सामने आया, जब लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे।
यह घोटाला मूल रूप से बिहार के पशुपालन विभाग से जुड़ा था। अधिकारियों और राजनेताओं की मिलीभगत से पशुओं के चारे, दवाइयों और उपकरणों के नाम पर फर्जी बिल बनाकर करोड़ों रुपये निकाले गए, जबकि वास्तविक खरीद नहीं हुई थी।

घोटाले के चौंकाने वाले तथ्य:
- कागजों पर हजारों काल्पनिक गाय-भैंसें दिखाकर चारे और दवाइयों के नाम पर रकम निकाली गई।
- बिलों में दर्ज कई वाहन नंबर जांच में स्कूटर और मोटरसाइकिल के निकले।
- चाईबासा, देवघर, दुमका और डोरंडा के सरकारी खजानों से आवंटन से कई गुना अधिक निकासी की गई।
- एक बिल में भैंसों के सींग चमकाने के लिए हजारों टन सरसों तेल खरीदने का दावा किया गया।
कैसे खुला मामला?
जनवरी 1996 में चाईबासा के तत्कालीन उपायुक्त अमित खरे की छापेमारी में इस घोटाले का खुलासा हुआ। मार्च 1996 में पटना हाईकोर्ट के आदेश पर जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई।
जांच में नाम आने और गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद 1997 में लालू यादव को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। बाद में उनकी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया गया।
किन मामलों में हुई सजा?
CBI ने इस घोटाले से जुड़े 53 अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। लालू यादव को मुख्य रूप से 5 बड़े मामलों में दोषी ठहराया गया:
- चाईबासा (RC 20A/96) – ₹37.7 करोड़ की निकासी (2013 में सजा)
- देवघर मामला – ₹89.27 लाख की निकासी (2017 में सजा)
- दूसरा चाईबासा मामला – ₹33.13 करोड़ (2018 में सजा)
- दुमका मामला – ₹3.76 करोड़ (14 साल की सजा)
- डोरंडा मामला – ₹139.35 करोड़ (2022 में सजा, सबसे बड़ा मामला)
फिलहाल लालू यादव आधी सजा पूरी करने और खराब स्वास्थ्य के आधार पर जमानत पर बाहर हैं।
आगे क्या?
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर राजनीतिक हलकों की नजर है। यदि जमानत रद्द होती है तो यह राजद के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। दूसरी ओर, बिहार सरकार दोषियों की संपत्ति जब्त कर घोटाले की राशि वसूलने की तैयारी में है।
इस मामले में कोर्ट का फैसला आने वाले दिनों में राजनीतिक परिदृश्य पर गहरा असर डाल सकता है।















