बिहार-झारखंड सहित देशभर के 15 स्थानों पर शुक्रवार सुबह से ही छापेमारी जारी है। कार्रवाई राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े कथित घोटाले को लेकर की जा रही है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अनियमित टेंडर प्रक्रिया, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र, फर्जी भुगतान और मेजरमेंट बुक (MB) में गड़बड़ी जैसे चार प्रमुख बिंदुओं पर जांच तेज कर दी है। जांच की अगुवाई एसपी पुष्पेंद्र राठौड़ कर रहे हैं।

20 हजार करोड़ के टेंडर पर सवाल
SIT ने करीब 20 हजार करोड़ रुपये के स्पेशल प्रोजेक्ट टेंडरों की फाइलें खंगालनी शुरू कर दी हैं। आरोप है कि 20 टेंडरों में नियम और शर्तों में बदलाव कर चुनिंदा बड़ी फर्मों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।
टेंडर प्रक्रिया में साइट इंस्पेक्शन की अनिवार्य शर्त जोड़ी गई थी, जिसके तहत कंपनियों को एक्सईएन से प्रमाण पत्र लेना जरूरी था। इस प्रावधान से पारदर्शिता पर सवाल उठे। बाद में वित्त विभाग ने इन टेंडरों को रद्द कर दिया।
फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र का मामला
जांच में सामने आया है कि इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के नाम से कथित फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार कर करीब 900 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए। ये टेंडर मुख्य रूप से श्री श्याम ट्यूबवेल और गणपति ट्यूबवेल फर्म को दिए गए।
एक्सईएन विशाल सक्सेना द्वारा केरल जाकर रिपोर्ट पेश करने की बात भी जांच के दायरे में है। SIT पूरे नेटवर्क में शामिल इंजीनियरों की भूमिका की जांच कर रही है।

55 करोड़ का फर्जी भुगतान
दो फर्मों को बिना कार्य किए करीब 55 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का आरोप है। इस मामले में 139 इंजीनियर जांच के घेरे में हैं, जिनमें 15 एक्सईएन, 40 एईएन और 50 जेईएन शामिल बताए जा रहे हैं।
फर्जी भुगतान जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़, दौसा, अलवर, नीमकाथाना और झुंझुनूं जिलों में हुआ। SIT इन भुगतानों से जुड़े बिल और दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।
178 मेजरमेंट बुक बरामद
ठेकेदारों के ठिकानों से 178 से अधिक मेजरमेंट बुक (MB) बरामद की गई हैं। MB सरकारी संपत्ति मानी जाती है और इसे ठेकेदारों के पास रखना नियमों के विरुद्ध है। आरोप है कि इन्हीं MB में मनमाने आंकड़े दर्ज कर करोड़ों रुपये का भुगतान कराया गया।
ACB-SIT ने जयपुर, बाड़मेर, दिल्ली, सीकर, जालोर, बिहार और झारखंड समेत 15 स्थानों पर छापेमारी की है। रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के संभावित ठिकानों की तलाशी ली गई।
ACB का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सैकड़ों करोड़ रुपये के गबन की आशंका ने राज्य की जल परियोजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।














